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MP Electricity News: रीडिंग सत्यापन का असर- विद्युत मीटर की ठीक से फोटो ले रहे वाचक, रुकेगी बिलों में गड़बड़ी

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भोपाल। भोपाल और ग्वालियर में विद्यत मीटर रीडिंग सत्यापन का काम शुरू हो गया है। आज सत्यापन प्रक्रिया का पांचवा दिन है। पहली बार मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने रीडिंग के सत्यापन की व्यवस्था लागू की है। इसके तहत उपभोक्ताओं के घरों में खपत होने वाली रीडिंग को दूसरे मीटर वाचकों से ऑनलाइन सत्यापित कराया जा रहा है। इस काम से पारदर्शिता बढ़ी है। मीटर वाचक मीटरों की ठीक से रीडिंग लेने के साथ मीटरों के फोटो भी सावधानीपूर्वक ले रहे हैं। यह बात यह बात रविवार तक यानी चार दिन की सत्‍यापन रिपोर्ट में सामने आई है। पूर्व में मीटर वाचक कई घरों में रीडिंग लेने नहीं पहुंचते थे, मीटर में कुछ और रीडिंग होती थी और नोट कुछ और कर लेते थे। मीटरों के फोटो ठीक से नहीं लिए जाते थे। इस वजह से ली गई रीडिंग और संबंधित मीटर के फोटो में दिखाई देने वाली रीडिंग मेल नहीं खाती थी। गड़बड़ बिल जारी हो जाते थे। उपभोक्ता परेशान होते थे।

अब एक मीटर वाचक द्वारा ली जा रही रीडिंग का दूसरे से सत्यापन कराने की व्यवस्था से सुधार हो रहा है। इससे जुलाई माह के बिलों में बड़े स्तर पर सुधार आने की संभावना है। भोपाल शहर में 250 मीटर वाचक हैं इनके द्वारा ली जाने वाली फोटो व अंकित की जाने वाली रीडिंग का दूसरे शहरों के मीटर वाचक ऑनलाइन मिलान कर रहे हैं। यही व्यवस्था ग्वालियर में भी लागू हुई है, जिसे सभी शहरों में लागू करने की योजना है।

ऐसे किया जा रहा रीडिंग का सत्यापन
— मीटर वाचक रीडिंग लेते हैं। फिर मीटर के फोटो ले रहे हैं। उस रिकार्ड को साफ्टवेयर में अपलोड कर रहे हैं।
— यह रिकार्ड दूसरे जिले के किसी भी मीटर वाचक को मोबाइल में डाउनलोड एप पर आवंटित हो रहा है।
— संबंधित मीटर वाचक पंच की गई रीडिंग व मीटर के फोटो में दिखाई दे रही रीडिंग का मिलान कर रहे हैं। यदि दोनों माध्यमों से ली गई रीडिंग सही है तो ‘यस’ का और अंतर मिलने पर ‘नो’ का विकल्प दबा रहे हैं।

— ‘यस’ के विकल्प का बटन दबाते ही संबंधित उपभोक्ता को बिल जारी हो रहे हैं। ‘नो’ करने पर संबंधित जोन के अधिकारी के पास मैसेज जा रहा है। उपभोक्ता के मीटर की रीडिंग दोबारा ली जा रही है। तब उसे बिल जारी किया जा रहा है।
ऐसे होगा सुधार
सत्यापन की जरूरत इसलिए पड़ रही है क्यों‎कि कई बार मीटर वाचक रीडिंग लेने नहीं आते। औसत खपत का बिल देते हैं। अगले माह वास्तविक खपत का बिल आता है, जो अधिक खपत का होता है। गड़बड़ी को लेकर शिकायत करनी पड़ती है। कुछ मीटर वाचकों से मानवीय भूल हो जाती है और वे रिकार्ड में अलग रीडिंग नोट कर लेते हैं। इस तरह गड़बड़ बिल जारी हो जाते हैं। कुछ मीटर वाचक जान-बूझकर आर्थिक लाभ के कारण गलत रीडिंग लेते हैं। बाद में उपभोक्ताओं को इसके नतीजे भुगतने पड़ते हैं। अब उपभोक्ताओं को औसत बिल नहीं दे सकेंगे। मानवीय भूल पकड़ में आएगी। जान-बूझकर गलत रीडिंग का बिल नहीं दे सकेंगे। उपभोक्ताओं को फायदा होगा। हर माह बिलों में गड़बड़ी की शिकायतें मिलती है। उनका निराकरण करने के लिए कंपनी को अमला लगाना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं के बीच छवि खराब होती है। रीडिंग सत्यापन से काफी हद तक यह नौबत पैदा नहीं होगी।

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