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Mother from Malta Indore: निरमा को लेने माल्टा से आई ‘मां’,

इंदौर Mother from Malta Indore। इंदौर के संजीवनी सेवा संगम शिशुगृह में रहने वाली साढ़े तीन साल की निरमा को माल्टा से आई ‘मां’ का प्यार व दुलार बुधवार को मिल गया। शहर के इस शिशुगृह में रहने वाली निरमा को माल्टा की हेडी गोद लेने के लिए इंदौर आईं।

अब निरमा माल्टा में अपनी नई मां के साथ रहकर सपनों को पूरा कर सकेगी। नन्हीं निरमा बुधवार को अपनी नई मां से मिलकर काफी खुश दिकी। वह उनके साथ खेल रही थी तो गोद में जाकर मस्ती भी कर रही थी। पिछले तीन साल से उसे मां का जो प्यार नहीं मिला, वह प्यार हेडी से पा रही है।

हेडी माल्टा में सरकारी विभाग में पशु कल्याण अधिकारी हैं। वे अविवाहित हैं और सिंगल मदर के रूप में उन्होंने इंदौर में रहने वाली ‘निरमा’ को गोद लिया है। हेडी ने पिछले वर्ष जुलाई में सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स अथाॅरिटी (कारा) में आवेदन दिया था।

अप्रैल में इस संबंध में न्यायालय का निर्णय होना था, लेकिन कोविड संक्रमण के कारण प्रक्रिया आगे बढ़ गई और अक्टूबर माह में निरमा को गोद देने की प्रक्रिया पूर्ण हुई। हेडी निरमा के लिए अपने साथ खिलौने, चाॅकलेट व कपड़े लेकर आई हैं।

उनके साथ उनके मित्र लॉरी भी इंदौर आए। हेडी के अनुसार उनके एक मित्र ने बेंगलुरू व कोलकाता से बच्चों को गोद लिया था। इस कारण उन्होंने भी भारत से एक बच्चा गोद लेने का निर्णय लिया। उन्हें इस बात की खुशी है कि उन्हें बेटी मिली। हेडी ने काम से चार माह की छुट्टी ली है जिससे निरमा के साथ समय बिता सकें। इसके बाद उसे स्कूल भेजेंगी। हेडी ने बताया कि वो अभी इशारों व कुछ-कुछ शब्दों से निरमा से बात करती हैं।

मां की मौत के बाद नाना झूले में छाेड़ मजदूरी करने जाते थे
संजीवनी सेवा संगम की अधीक्षक आशा सिंह राठौर के अनुसार बड़वानी में निरमा की मां का बचपन में निधन हो गया था। गरीबी के कारण नाना-नानी के लिए नवजात को पालना मुश्किल था। वे मासूम को झूले में छोड़ मजदूरी करने जाते थे। आसपास वाले नवजात बालिका की देखरेख कर भूख लगने पर बोतल में दूध तो कभी बिना दूध की काली चाय दे जाते थे। चाइल्डलाइन ने रेस्क्यू किया और दो साल पहले बाल कल्याण समिति के आदेश से निरमा संजीवनी सेवा संगम शिशुगृह में आई। वह यहां दो साल से रह रही थी।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम