बिखर गई ममता की ‘ममता’- TMC में भारी बगावत के बीच ममता बनर्जी पर FIR, भतीजे अभिषेक से 5 घंटे पूछताछ, फलता में टीएमसी नेता की हाफ पैंट में परेड

बिखर गई ममता की 'ममता'- TMC में भारी बगावत के बीच ममता बनर्जी पर FIR, भतीजे अभिषेक से 5 घंटे पूछताछ, फलता में टीएमसी नेता की हाफ पैंट में परेड

बिखर गई ममता की ‘ममता’- TMC में भारी बगावत के बीच ममता बनर्जी पर FIR, भतीजे अभिषेक से 5 घंटे पूछताछ, फलता में टीएमसी नेता की हाफ पैंट में परेड

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और विस्फोटक खबर सामने आ रही है। चुनावी हार का झटका अभी ठीक से लगा भी नहीं था कि 28 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ताश के पत्तों की तरह ढहती नजर आ रही है। कोलकाता से लेकर दिल्ली तक ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत की आग भड़क उठी है। विधायक, सांसद और पार्षदों में पार्टी छोड़ने की होड़ मची है। इसी बीच, ममता बनर्जी और उनके परिवार पर चौतरफा कानूनी शिकंजा कस गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता पुलिस ने ही FIR दर्ज कर ली है, वहीं उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी से सीआईडी (CID) ने साढ़े 5 घंटे तक तीखी पूछताछ की है।

1. क्या है पूरा मामला? ममता बनर्जी पर क्यों हुई FIR?

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब कोलकाता के हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में आधिकारिक तौर पर FIR (नंबर: 0106) दर्ज की गई।

2. भतीजे अभिषेक बनर्जी से 5.5 घंटे पूछताछ, 14 जून को फिर बुलावा

दूसरी तरफ, ममता के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी भी कानूनी चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस चुके हैं। फर्जी सिग्नेचर (विधायकों के जाली दस्तखत) मामले में गुरुवार को अभिषेक बनर्जी बंगाल सीआईडी (CID) के सामने पेश हुए।

3. ‘पुष्पा’ स्टाइल खत्म- फलता में TMC नेता जहांगीर खान की हाफ पैंट में परेड

बंगाल में सत्ता का रसूख किस कदर जमीन पर आ गिरा है, इसका सबसे बड़ा नजारा दक्षिण 24 परगना के फलता इलाके में देखने को मिला। कभी खुद को इलाके का ‘पुष्पा’ समझने वाले और फलता विधानसभा सीट से टीएमसी उम्मीदवार रहे जहांगीर खान का पुलिस ने सारा भौकाल उतार दिया।

यश भारत का तीखा विश्लेषण: 28 साल पुरानी टीएमसी आज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। 58 से अधिक विधायकों की बगावत के बाद विधानसभा में पार्टी दो फाड़ हो चुकी है। अब शीर्ष नेतृत्व पर कसता कानूनी शिकंजा और कार्यकर्ताओं का सरेआम होता ये हाल साफ बता रहा है कि बंगाल की राजनीति में ‘ममता युग’ का अंत बेहद करीब है।

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