दतिया का महादंगल: नामांकन के आखिरी दिन आमने-सामने आए भाजपा-कांग्रेस के सूरमा, भारी शक्ति प्रदर्शन के बीच दाखिल किए पर्चे

दतिया का महादंगल: नामांकन के आखिरी दिन आमने-सामने आए भाजपा-कांग्रेस के सूरमा, भारी शक्ति प्रदर्शन के बीच दाखिल किए पर्चे

दतिया का महादंगल: नामांकन के आखिरी दिन आमने-सामने आए भाजपा-कांग्रेस के सूरमा, भारी शक्ति प्रदर्शन के बीच दाखिल किए पर्चे

ग्वालियर/दतिया: दतिया विधानसभा उपचुनाव (Datia Assembly Bypoll 2026) के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई. सोमवार को कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रमुख दलों के उम्मीदवारों ने भारी लाव-लश्कर और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपना-अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से जोरदार शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला.

उमंग सिंघार और फूल सिंह बरैया की मौजूदगी में कांग्रेस का पर्चा

दोपहर करीब 12 बजे कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने दतिया रिटर्निंग ऑफिसर के सामने अपना नामांकन पत्र जमा किया. इस मौके पर कांग्रेस एकजुटता दिखाने की पूरी कोशिश में नजर आई: दतिया का महादंगल: नामांकन के आखिरी दिन आमने-सामने आए भाजपा-कांग्रेस के सूरमा, भारी शक्ति प्रदर्शन के बीच दाखिल किए पर्चे

 मैदान से नदारद रहे जीतू पटवारी, पर्दे के पीछे संभाली कमान

इस पूरे शक्ति प्रदर्शन के बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी नामांकन रैली या फॉर्म जमा करने के दौरान नजर नहीं आए. हालांकि, वे दतिया में ही मौजूद हैं.

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 जीतू पटवारी क्यों रहे दूर?

जीतू पटवारी रविवार शाम से ही दतिया में डेरा डाले हुए हैं. उनका नामांकन में न जाना किसी नाराजगी की वजह से नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर भड़की ‘बगावत’ को शांत करने की रणनीति का हिस्सा है. वे दतिया के नाराज कांग्रेस नेताओं जैसे अवधेश नायक और राजेंद्र भारती को मनाने और डैमेज कंट्रोल (नाराजगी दूर करने) में जुटे हुए हैं ताकि चुनाव में पार्टी को भितरघात से बचाया जा सके.

 अब शुरू होगा असली मुकाबला

बीजेपी की तरफ से आशुतोष तिवारी और कांग्रेस की तरफ से घनश्याम सिंह का नामांकन जमा होने के बाद अब दतिया का चुनावी दंगल पूरी तरह सज चुका है. नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब दोनों ही दल पूरी ताकत से चुनावी रैलियों और जनसंपर्क में जुटने वाले हैं. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उपजे असंतोष और कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान के बीच यह मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है.

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