रेलवे का बड़ा फैसला: रतलाम मंडल के 9 बड़े स्टेशनों पर निजी हाथों में जाएगी पूछताछ सेवा, पश्चिम रेलवे में पहली बार ऐसा प्रयोग

रेलवे का बड़ा फैसला: रतलाम मंडल के 9 बड़े स्टेशनों पर निजी हाथों में जाएगी पूछताछ सेवा, पश्चिम रेलवे में पहली बार ऐसा प्रयोग

रेलवे का बड़ा फैसला: रतलाम मंडल के 9 बड़े स्टेशनों पर निजी हाथों में जाएगी पूछताछ सेवा, पश्चिम रेलवे में पहली बार ऐसा प्रयोग

रतलाम: पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने रेल यात्रियों की सुविधा और अपने आंतरिक प्रबंधन को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला किया है। मंडल प्रशासन ने अपने प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पूछताछ केंद्रों (Enquiry Counters) का संचालन पूरी तरह से एक निजी आउटसोर्स एजेंसी को सौंपने का निर्णय लिया है।

20 जुलाई 2026 से रतलाम मंडल के 9 प्रमुख स्टेशनों पर बने 10 पूछताछ काउंटरों की कमान निजी कर्मचारियों के हाथों में होगी। इस नई व्यवस्था को लागू करने वाला रतलाम मंडल पूरे पश्चिम रेलवे का पहला मंडल बन जाएगा।

 24 घंटे मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं, हैदराबाद की कंपनी को मिला जिम्मा

रेलवे प्रशासन का दावा है कि निजीकरण के इस कदम से यात्रियों को चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के आधुनिक पूछताछ सुविधाएं मिलेंगी।

इन 9 प्रमुख स्टेशनों पर बदलेगी व्यवस्था

रतलाम मंडल के जिन नौ प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पूछताछ काउंटरों को आउटसोर्स किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं: रेलवे का बड़ा फैसला: रतलाम मंडल के 9 बड़े स्टेशनों पर निजी हाथों में जाएगी पूछताछ सेवा, पश्चिम रेलवे में पहली बार ऐसा प्रयोग

निजी स्टाफ को रेलवे खुद देगा स्पेशल ट्रेनिंग

रेलमंडल जनसंपर्क अधिकारी (PRO) मुकेश कुमार के अनुसार, चयनित निजी एजेंसी इन काउंटरों पर करीब 40 प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती करेगी। ड्यूटी पर लगाने से पहले इन सभी कर्मचारियों को रेलवे की कार्यप्रणाली की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।

ये कर्मचारी मुख्य रूप से निम्नलिखित जिम्मेदारियां संभालेंगे:

 टिकट चेकिंग स्टाफ की कमी होगी दूर, बढ़ेगा रेलवे का राजस्व

वर्तमान में इन सभी पूछताछ केंद्रों पर रेलवे के टिकट चेकिंग और रिजर्वेशन कैडर के 37 रेल कर्मचारी तैनात हैं। स्टेशनों पर निजी स्टाफ आने से अब इन 37 रेल कर्मचारियों को उनके मूल विभागों (टिकट चेकिंग और रिजर्वेशन ड्यूटी) में वापस भेज दिया जाएगा।

रेलवे का मानना है कि इस कदम से ट्रेनों और स्टेशनों पर टिकट जांच व्यवस्था काफी मजबूत होगी, अनाधिकृत यात्रियों पर लगाम कसेगी और रेलवे के राजस्व (Income) में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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