सिवनी में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: उपतहसील कार्यालय का बाबू 1500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, केस खत्म करने के नाम पर मांगे थे पैसे

सिवनी में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: उपतहसील कार्यालय का बाबू 1500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, केस खत्म करने के नाम पर मांगे थे पैसे

सिवनी में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: उपतहसील कार्यालय का बाबू 1500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, केस खत्म करने के नाम पर मांगे थे पैसे

सिवनी/केवलारी: मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले की केवलारी तहसील के अंतर्गत उगली उपतहसील कार्यालय में लोकायुक्त पुलिस जबलपुर की टीम ने सोमवार (13 जुलाई) को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लिपिक (बाबू) का काम संभाल रहे कोटवार को 1,500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी ने एक महिला आवेदक से थाने में दर्ज इस्तगासा (केस) को खत्म करने और राहत देने के एवज में रिश्वत की मांग की थी।सिवनी में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: उपतहसील कार्यालय का बाबू 1500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, केस खत्म करने के नाम पर मांगे थे पैसे

क्या है पूरा मामला?

लोकायुक्त पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला एक आपसी विवाद से जुड़ा हुआ है:

केस रफा-दफा करने के लिए मांगे थे 3,000 रुपये

इस मामले में राहत देने और केस को पूरी तरह खत्म करने के एवज में उगली उपतहसील कार्यालय में लिपिक (बाबू) का प्रभार संभाल रहे ग्राम पौड़ी के कोटवार कमलेश गनवीर ने आवेदिका रीना ठाकरे से 3,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

आवेदिका रिश्वत नहीं देना चाहती थी, इसलिए उसने इसकी लिखित शिकायत जबलपुर लोकायुक्त एसपी कार्यालय में दर्ज करा दी। सिवनी में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: उपतहसील कार्यालय का बाबू 1500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, केस खत्म करने के नाम पर मांगे थे पैसे

लोकायुक्त ने बिछाया जाल, पहली किस्त लेते ही धराया

शिकायत का सत्यापन करने के बाद जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने सोमवार को उगली उपतहसील कार्यालय में जाल बिछाया। जैसे ही आवेदिका ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 1,500 रुपये आरोपी लिपिक कमलेश गनवीर को दिए, वैसे ही पहले से तैयार बैठी लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अनुकंपा नियुक्ति संवेदना का विषय हो सकती है, लेकिन सेवा नियमों का विकल्प नहीं; कंप्यूटर साइंस में BE की डिग्री होने पर भी नौकरी से निकाला

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