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Khargone Education System: आदिवासी इलाकों के स्कूल में स्‍कूल नहीं जाते शि‍क्षक, नहीं सुनते अधि‍कारी

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Khargone Education System: आदिवासी इलाकों के स्कूल में स्‍कूल नहीं जाते शि‍क्षक,  अधि‍कारी नहीं सुनते हैं। शासन ने भले ही ग्रामीण क्षेत्रों शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बड़ी- बड़ी इमारतें व भवन बना दिए हैं। लेकिन इनमें मिलने वाली शिक्षा  शून्य है। ग्रामीणों क्षेत्रों में योजनाएं तो लागू की जाती है। लेकिन धरातल पर सिर्फ कागज में ही यह क्रियान्वित है। इन स्कूलों के शिक्षक ही शिक्षा व स्कूल में मिलने वाले पौष्टिक आहार जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को पलीता लगाने में लगे हैं।

यह आलम तहसील मुख्यालय के ग्राम वेस्ता फाल्या की प्राथमिक स्कूल का है, जो दो दिनों से बंद है। यहां स्थिति इतनी दयनिय है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे शासन की ओर से मिलने वाली उच्च शिक्षा मध्याह्न भोजन के लाभ आज तक नहीं मिला। ग्राम अंजनगांव के संकुल के अन्तर्गत आने वाला यह प्राथमिक स्कूल सप्ताह में दो से तीन बार ही खुलता है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने से शिक्षक अपनी मन मर्जी से स्कूल आते।

ग्रामीणों ने बताया कि कई दफा हम अधिकारियों को आवेदन दे चुके है। परंतु आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं अति होने पर शिकायत के बाद दिखावे के लिए पंचनामे तो बना दिए जाते हैं। लेकिन शिक्षकों की ब्लाक विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ होने से पंचनामे कार्यालय में इतिश्री कर दिए जाते है। इसी कारण ग्राम वेस्ता फाल्या में पदस्थ शिक्षकों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।

अभिभावकों ने बताई स्थिति

प्राथमिक स्कूल में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ जितेन्द्र मोयदे व पदस्थ शिक्षक विजय मेहरा दोनों ही गुरुवार से स्कूल में उपस्थित नहीं है। प्रधान पाठक जितेन्द्र मायदे, विजय मेहरा से स्कूल नहीं खुलने के कारण पूछा ने पर ग्राम अंजनगांव के संकुल केंद्र में किसी शासकीय कार्य का बताकर पल्ला झाड़ते दिखे।

जबकि शासन के नियम के अनुसार स्कूल संबंधित जानकारी भेजना हो या अन्य कार्य हो तो एक शिक्षक को जाना पड़ता है। बाकी अन्य शिक्षकों को स्कूल में रह कर बच्चो पढ़ाना पड़ता है। परंतु लगता है ग्राम वेस्ता फाल्या में पदस्थ शिक्षक शासन के नियम से नहीं अपने नियम से चलते हैं।

दीप सिंह निवासी वेस्ता फाल्या ने बताया कि स्कूल में शिक्षक मंगलवार को आए थे। बुधवार, गुरुवार को नहीं आए। यहां पर कोई बोलने वाला नहीं है। स्कूल में खाना भी नहीं बनता है। पदस्थ शिक्षक कभी आते हैं। कभी नहीं आते हैं।

 

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