कड़कड़डूमा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार, 6 बरी

कड़कड़डूमा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार, 6 बरी

कड़कड़डूमा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार, 6 बरी

नई दिल्ली: साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के युवा अधिकारी अंकित शर्मा की बर्बरतापूर्वक की गई हत्या के मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई, 2026) को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 आरोपियों को दोषी करार दिया है

लगभग छह साल तक चली लंबी जांच, सैकड़ों गवाहों के बयानों और फॉरेंसिक सबूतों को देखने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) प्रवीन सिंह ने यह फैसला सुनाया। इस मामले में कुल 11 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे, जिनमें से 6 आरोपियों को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया है।

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किन-किन धाराओं में दोषी पाए गए ताहिर हुसैन?

अदालत ने ताहिर हुसैन को मुख्य रूप से भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्नलिखित संगीन धाराओं के तहत दोषी माना है:

कोर्ट की दो टूक: “हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने आई थी भीड़”

कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपने फैसले में अभियोजन पक्ष (Prosecution) की दलीलों को पूरी तरह सही माना। कोर्ट ने कहा:

“यह संदेह से परे साबित हो चुका है कि 25 फरवरी 2020 की शाम ताहिर हुसैन चांद बाग पुलिया पर जुटी हिंसक भीड़ का हिस्सा थे। इस भीड़ का मकसद हिंदू समुदाय के लोगों पर हमला करना, उनके घरों में आगजनी करना और दहशत फैलाना था। आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा जब भीड़ को शांत कराने पहुंचे, तब ताहिर हुसैन के उकसावे पर ही भीड़ ने उन्हें घेरकर बंधक बनाया और चाकू मारकर बेरहमी से उनकी हत्या कर दी। चूंकि ताहिर हुसैन उस हिंसक भीड़ के अगुआ और सदस्य थे, इसलिए वे इस कृत्य के लिए सीधे जिम्मेदार हैं।”

1 घाव और नाले में लाश: क्या थी वह खौफनाक वारदात?

यह हत्याकांड 2020 के दिल्ली दंगों के सबसे खौफनाक पन्नों में से एक है।

 अब सवाल: क्या ताहिर हुसैन को मिलेगी फांसी या उम्रकैद?

हत्या (IPC 302) के जुर्म में दोषी साबित होने के बाद अब केवल दो ही सजाओं का कानूनी प्रावधान बचता है:

संभावित सजा कानूनी मापदंड
उम्रकैद (आजीवन कारावास) हत्या के मामलों में यह न्यूनतम वैधानिक सजा है, जिसमें दोषी को पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे काटनी होती है।
मृत्युदंड (फांसी की सजा) यह केवल देश के ‘दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों’ (Rarest of Rare Cases) में ही दी जाती है।

अभियोजन पक्ष की मांग: माना जा रहा है कि एक ऑन-ड्यूटी सुरक्षाकर्मी की ऐसी वीभत्स हत्या के लिए सरकारी वकील फांसी की सजा की मांग कर सकते हैं। हालांकि, सजा के निर्धारण (Quantum of Sentence) पर बहस के लिए कोर्ट जल्द ही अगली तारीख तय करेगा, जिसके बाद अंतिम सजा का ऐलान होगा।

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