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MP में UCC पर बड़ा कदम: सीएम मोहन यादव को सौंपी गई समान नागरिक संहिता की फाइनल रिपोर्ट; मानसून सत्र में आ सकता है बिल

MP में UCC पर बड़ा कदम: सीएम मोहन यादव को सौंपी गई समान नागरिक संहिता की फाइनल रिपोर्ट; मानसून सत्र में आ सकता है बिल

MP में UCC पर बड़ा कदम: सीएम मोहन यादव को सौंपी गई समान नागरिक संहिता की फाइनल रिपोर्ट; मानसून सत्र में आ सकता है बिल

MP में UCC पर बड़ा कदम: सीएम मोहन यादव को सौंपी गई समान नागरिक संहिता की फाइनल रिपोर्ट; मानसून सत्र में आ सकता है बिल

भोपाल: उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति हुई है. मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपनी अंतिम (फाइनल) रिपोर्ट सौंप दी है. मुख्यमंत्री ने समय-सीमा के भीतर इस बेहद महत्वपूर्ण प्रतिवेदन को तैयार करने के लिए समिति की अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया है.

इस रिपोर्ट को सौंपे जाने के बाद सीएम डॉ. यादव ने विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि कांग्रेस को अब इस विषय पर अपना स्टैंड (रुख) पूरी तरह स्पष्ट करना चाहिए.

 3 खंड, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां: जानिए क्या है रिपोर्ट में?

मुख्यमंत्री को सौंपा गया यह ऐतिहासिक प्रतिवेदन कुल 3 खंडों में संकलित किया गया है, जिसका पूरा खाका इस प्रकार है:

 आदिवासी समुदाय (ST) को यूसीसी से बाहर रखने की सिफारिश

समिति ने अपनी रिपोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण अनुशंसा की है कि मध्य प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को समान नागरिक संहिता के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाए. MP में UCC पर बड़ा कदम: सीएम मोहन यादव को सौंपी गई समान नागरिक संहिता की फाइनल रिपोर्ट; मानसून सत्र में आ सकता है बिल

 9.58 लाख से अधिक लोगों ने दिए सुझाव

समिति को इस कानून के निर्माण के दौरान जनता से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली. रिपोर्ट के अनुसार, समिति को कुल 9.58 लाख से अधिक परामर्श और सुझाव प्राप्त हुए थे. तीसरे खंड में इन सभी सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार (Male/Female) और समुदायवार विस्तृत विश्लेषण शामिल किया गया है.

 किन विषयों पर केंद्रित है यह कानून?

राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण (गुजारा भत्ता), उत्तराधिकार (संपत्ति अधिकार), दत्तक ग्रहण (गोद लेना) तथा लिव-इन संबंधों (Live-in Relationships) से जुड़े विषयों पर अध्ययन कर कानून का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी. इस ड्राफ्ट को तैयार करते समय लैंगिक समानता (Gender Equality), संवैधानिक प्रावधानों और समाज के विविध अनुष्ठानिक रीति-रिवाजों के सम्मान को मूल आधार बनाया गया है.

 मानसून सत्र में ही विधानसभा में पेश हो सकता है विधेयक

मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इस प्रतिवेदन को तत्काल राज्य शासन के विधि विभाग (Law Department) को हस्तांतरित कर दिया गया है.

 “वोट बैंक की राजनीति छोड़ रुख साफ करे कांग्रेस” – सीएम डॉ. मोहन यादव

रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा:

“समिति ने हमें यूसीसी की विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है. अब कांग्रेस को भी इस पर अपनी बात रखनी चाहिए. चाहे यूसीसी का मुद्दा हो या धार की भोजशाला का, कांग्रेस हर गंभीर विषय को केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के चश्मे से ही देखती है. देश के सभी धर्मों के नागरिकों ने यूसीसी पर अपने विचार खुलकर सामने रखे हैं, लेकिन कांग्रेस अब तक चुप्पी साधे हुए है.”

इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया मुख्य रूप से उपस्थित रहे. मुख्यमंत्री ने समिति की अध्यक्ष व सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर का भी विशेष धन्यवाद किया, जो व्यक्तिगत कारणों से कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके थे.

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