Katni Industrial Crackdown: कटनी में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी पर बड़ी गाज- ‘मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल’ को तुरंत बंद करने का आदेश; बिजली काटने और सरकारी सुविधाएं छीनने के निर्देश

Katni Industrial Crackdown: कटनी में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी पर बड़ी गाज- 'मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल' को तुरंत बंद करने का आदेश; बिजली काटने और सरकारी सुविधाएं छीनने के निर्देश

Katni Industrial Crackdown: कटनी में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी पर बड़ी गाज- ‘मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल’ को तुरंत बंद करने का आदेश; बिजली काटने और सरकारी सुविधाएं छीनने के निर्देश

कटनी: कटनी जिले में नियम विरुद्ध और अवैध रूप से संचालित औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के सख्त रुख के बाद हड़कंप मच गया है। कलेक्टर के कड़े निर्देशों पर अमल करते हुए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पीरबाबा इलाके में स्थित मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रदूषण नियमों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर संस्था को तत्काल प्रभाव से अपने उद्योग का संचालन बंद करने (क्लोजर) का फरमान जारी कर दिया गया है।

 सम्मति का नवीनीकरण न कराना पड़ा भारी

म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्री सुधांशु तिवारी ने इस सख्त कार्रवाई के पीछे की मुख्य वजहों का खुलासा किया है:

 नालियों में सीधे बहाया जा रहा था जहर, नहीं लगाया था ‘ईटीपी’

प्रदूषण बोर्ड की टीम ने जब इस संस्थान का औचक निरीक्षण किया, तो वहां की बदहाली और लापरवाही देखकर अधिकारी भी दंग रह गए:

 सिर्फ ताला ही नहीं… बिजली काटने और सरकारी लाभ रोकने का भी हंटर!

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी की ढिठाई को देखते हुए जल अधिनियम 1974 की धारा 33-‘क’ एवं वायु अधिनियम 1981 की धारा 31-‘क’ के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए न सिर्फ उद्योग को तुरंत बंद कराया है, बल्कि चौतरफा शिकंजा कस दिया है:

आदेश की अवहेलना की तो सीधे जेल की तैयारी!

क्षेत्रीय अधिकारी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल प्रा.लि. द्वारा इस बंदी के आदेश की जरा भी अवहेलना की गई या चोरी-छिपे काम चालू रखने की कोशिश की गई, तो वायु अधिनियम की धारा 37(1) के तहत सीधे वैधानिक न्यायालयीन (कोर्ट) कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित संस्था की स्वयं की होगी।

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