Katni Industrial Crackdown: कटनी में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी पर बड़ी गाज- ‘मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल’ को तुरंत बंद करने का आदेश; बिजली काटने और सरकारी सुविधाएं छीनने के निर्देश
Katni Industrial Crackdown: कटनी में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी पर बड़ी गाज- 'मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल' को तुरंत बंद करने का आदेश; बिजली काटने और सरकारी सुविधाएं छीनने के निर्देश
Katni Industrial Crackdown: कटनी में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी पर बड़ी गाज- ‘मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल’ को तुरंत बंद करने का आदेश; बिजली काटने और सरकारी सुविधाएं छीनने के निर्देश
कटनी: कटनी जिले में नियम विरुद्ध और अवैध रूप से संचालित औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के सख्त रुख के बाद हड़कंप मच गया है। कलेक्टर के कड़े निर्देशों पर अमल करते हुए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पीरबाबा इलाके में स्थित मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रदूषण नियमों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर संस्था को तत्काल प्रभाव से अपने उद्योग का संचालन बंद करने (क्लोजर) का फरमान जारी कर दिया गया है।
सम्मति का नवीनीकरण न कराना पड़ा भारी
म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्री सुधांशु तिवारी ने इस सख्त कार्रवाई के पीछे की मुख्य वजहों का खुलासा किया है:
-
कानूनी नियमों की अनदेखी: संबंधित संस्था द्वारा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 के तहत जो अनिवार्य सम्मति (Consent) चाहिए होती है, उसका समय पर नवीनीकरण (Renewal) नहीं कराया गया था।Katni Industrial Crackdown: कटनी में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी पर बड़ी गाज- ‘मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल’ को तुरंत बंद करने का आदेश; बिजली काटने और सरकारी सुविधाएं छीनने के निर्देश
-
नियम हैं बेहद कड़े: नियमों के मुताबिक, किसी भी औद्योगिक इकाई को चलाने के लिए इन दोनों अधिनियमों के तहत बोर्ड से सम्मति लेना और उसका नियमित रूप से रिन्यूअल कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
नालियों में सीधे बहाया जा रहा था जहर, नहीं लगाया था ‘ईटीपी’
प्रदूषण बोर्ड की टीम ने जब इस संस्थान का औचक निरीक्षण किया, तो वहां की बदहाली और लापरवाही देखकर अधिकारी भी दंग रह गए:
-
गंभीर जल प्रदूषण: कंपनी परिसर में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र यानी ईटीपी (Effluent Treatment Plant – ETP) स्थापित ही नहीं किया गया था।
-
अधिकारियों के आदेश को ठेंगा: बोर्ड द्वारा पहले दिए गए सख्त निर्देशों के बावजूद कंपनी प्रबंधन द्वारा बिना उपचारित किया गया (Un-treated) केमिकल और दूषित पानी सीधे आम नालियों में खुलेआम छोड़ा जा रहा था। इससे आसपास के पूरे रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्र में जल प्रदूषण की गंभीर और जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जो पर्यावरण अधिनियमों का स्पष्ट और खुला उल्लंघन है।
सिर्फ ताला ही नहीं… बिजली काटने और सरकारी लाभ रोकने का भी हंटर!
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी की ढिठाई को देखते हुए जल अधिनियम 1974 की धारा 33-‘क’ एवं वायु अधिनियम 1981 की धारा 31-‘क’ के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए न सिर्फ उद्योग को तुरंत बंद कराया है, बल्कि चौतरफा शिकंजा कस दिया है:
-
कटेगा बिजली कनेक्शन: बोर्ड ने म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को पत्र लिखकर संस्था का बिजली कनेक्शन तुरंत काटने के आदेश दिए हैं। Katni Industrial Crackdown: कटनी में प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी पर बड़ी गाज- ‘मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल’ को तुरंत बंद करने का आदेश; बिजली काटने और सरकारी सुविधाएं छीनने के निर्देश
-
शासकीय सुविधाएं रद्द: इसके साथ ही उद्योग विभाग को निर्देशित किया गया है कि इस कंपनी को दी जा रही सभी सरकारी सुविधाएं और सब्सिडी तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाएं।
आदेश की अवहेलना की तो सीधे जेल की तैयारी!
क्षेत्रीय अधिकारी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मेसर्स प्रेस्टीज व्हीकल प्रा.लि. द्वारा इस बंदी के आदेश की जरा भी अवहेलना की गई या चोरी-छिपे काम चालू रखने की कोशिश की गई, तो वायु अधिनियम की धारा 37(1) के तहत सीधे वैधानिक न्यायालयीन (कोर्ट) कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित संस्था की स्वयं की होगी।








