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Jamaat में महिलाएं भी थीं शामिल, अब इनका पता लगाना मुश्किल

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नई दिल्ली, भोपाल। कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई Tablighi Jamaat वालों के कारण कमजोर पड़ गई। ताजा खबर और चिंता बढ़ाने वाली है। खबर है कि निजामुद्दीन के Tablighi मरकज में बड़ी संख्या में महिला जमातियों ने भी हिस्सा लिया था। अब तक यहां से हजारों की संख्या में पुरुष जमाती निकले हैं, लेकिन कोई महिला नहीं मिली है। अब आशंका जताई जा रही है कि मरकज से निकल चुकीं ये महिला जमाती भी कोरोना पॉजिटिव हो सकती हैं और दूसरों में संक्रमण का कारण बन रही होंगी। क्राइम ब्रांच से लेकर अन्य सभी जांच एजेंसियां इन महिला जमातियों से अनजान बनी हुई हैं। दरअसल, Tablighi Jamaat में ये महिलाएं पिता, भाई या बेटे के साथ शामिल होती हैं। इसको मस्तूरात की जमात कहा जाता है, जिसमें महिला और पुरुष दोनों होते हैं। पुरुष मस्जिद में रुकते हैं, जबकि महिलाएं मस्जिद के आसपास के किसी घर में।

LockDown के दौरान निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी मरकज से जो जमाती मिले थे, उनमें देश के विभिन्न राज्यों और विदेश से आई महिलाएं भी थीं। Tablighi Jamaat से जुड़े हुए अब्दुल सईद ने बताया कि मरकज में महिलाओं के रुकने के लिए एक बड़ा हॉल बना हुआ है। वहां पुरुषों के आने-जाने पर पाबंदी है।

बहरहाल ये महिलाएं पर्दे में रहती हैं, किसी गैर मर्द के सामने वह नकाब नहीं हटाती हैं। मस्तूरात जमात की महिलाएं जहां रुकती हैं, वहां मोहल्ले की महिलाएं आती हैं, जिन्हें वे इस्लाम की बातें बताती हैं। Tablighi Jamaat में शामिल किसी महिला को कोरोना वायरस है या नहीं इसके बारे में अभी कुछ पता नहीं चल पाया है, लेकिन अगर किसी को कोरोना हुआ तो गंभीरता का अंदाजा लगाना मुश्किल होगा।

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