Jabalpur High Court: E-Tendring घोटाले के सभी आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज

जबलपुर। जबलपुर हाइकोर्ट ने ई टेंडरिंग घोटाले के सभी आरोपियों की जमानत अर्जी आज खारिज कर दी।
मिली जानकारी के मुताबिक हजार करोड़ रुपए का ई-टेंडर घोटाला उजागर करने वाले एमपीएसईडीसी के तत्कालीन एमडी आईएएस अफसर मनीष रस्तोगी से डीजी ईओडब्ल्यू केएन तिवारी ने करीब डेढ़ घंटे बातचीत कर यह समझा की आखिर टेंडरों में छेड़छाड़ कैसे हुई और उन्हें पकड़ा कैसे गया? इसके बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। ईओडब्ल्यू ने मंगलवार को आईएएस रस्तोगी को तलब किया था। वहीं, बैंगलुरू की एंट्रेस कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट मनोहर एमएन से भी जांच एजेंसी गड़बड़ी के संबंध में पूछताछ कर रही है।
राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी ने एमपीएसईडीसी के एमडी रहते हुए 9 ई-टेंडर में छेड़छाड़ पकड़ी थी। शासन ने गड़बड़ी की जांच ईओडब्ल्यू को दी थी। ई-टेंडर में छेड़छाड़ की पुष्टि होने पर ईओडब्ल्यू ने सात कंपनियों समेत 20 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में गिरफ्तार एमपीएसईडीसी के नोडल अधिकारी नंदकिशोर ब्रम्हे और आॅस्मो आईटी के डायरेक्टर विनय चौधरी, वरूण चतुर्वेदी व सुमित गोलवलकर को कोर्ट जेल भेज चुकी है। जांच एजेंसी को आरोपियों से पूछताछ में छेड़छाड़ से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।
बारीकियां समझी: मंगलवार की शाम आईएएस रस्तोगी ईओडब्ल्यू मुख्यालय पहुंचे थे। डीजी ईओडब्ल्यू केएन तिवारी ने करीब डेढ़ घंटे उनसे ई-टेंडर की बारीकियां समझी। इस दौरान रस्तोगी ने उन्हें बताया कि टेंपरिंग कैसे और कहां से की गई थी। साथ ही यह भी बताया कि टेंपरिंग कैसे पकड़ी गई। यह गड़बड़ी पूर्व में जारी हुए ई-टेंडर में भी हुई है। इस संबंध में प्रमुख सचिव रस्तोगी का कहना है कि वे किसी काम से ईओडब्ल्यू गए थे। ई-टेंडर की जांच ईओडब्ल्यू कर रही है। इस संबंध में कोई बातचीत नहीं हुई है।
ई-टेंडर में टेंपरिंग पकड़ी थी: डीजी केएन तिवारी का कहना है कि आईएएस मनीष रस्तोगी ने ही ई-टेंडर में टेंपरिंग पकड़ी थी। उन्होंने ही सीनियर अफसरों को जानकारी दी थी। इसके बाद ईओडब्ल्यू को मामला सौंपा गया था। मंगलवार को रस्तोगी को बुलाया था। उनसे टेंपरिंग के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई है। वहीं, एंट्रेस कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट मनोहर एमएन समेत अन्य लोगों से जांच एजेंसी दिनभर पूछताछ करती है। ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के सर्वर का मेंटनेंस, नेटवर्किंग और हेल्पडेस्क सहित ज्यादातर काम एन्ट्रेस प्रालि. बेंगलुरू व टीसीएस के पास था। दोनों कंपनियों के अधिकारियों के पास इनके लॉगइन पासवर्ड और डिजिटल सिग्नेचर थे। लाॅगइन, पासवर्ड और डिजिटल सिग्नेचर लीक होने के संबंध में एंट्रेस कंपनी वाइस प्रेसिडेंट से पूछताछ जा रही है।
पांच करोड़ से ऊपर के टेंडर की जानकारी मांगी : इधर, जांच एजेंसी ने सभी विभागों से 2012 से अब के ई-टेंडर की जानकारी मांगी है। टेंडरों की संख्या अधिक होने के कारण जांच एजेंसी फिलहाल पांच करोड़ से ऊपर वाले टेंडरों की ही जांच करेगी। विभागों से पांच करोड़ से ऊपर की राशि वाले टेंडर की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। ऐसे टेंडरों की संख्या 100 से अधिक हो सकती है।
ब्रम्हे की जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज
अदालत ने ई-टेंडरिंग घोटाले के आरोपी तत्कालीन नोडल अधिकारी नंदकिशोर ब्रम्हे की ओर से पेश जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। विशेष न्यायाधीश संजीव पांडे की अदालत ने आरोपी की ओर से पेश जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए मामले में जांच का जारी होना और मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत का लाभ देने से इंकार कर दिया








