Site icon Yashbharat.com

सरकारी अस्पतालों में दवा खरीदी में अनियमितता! थर्ड पार्टी जांच के बिना बांटी जा रही दवाएं

mediciine

सरकारी अस्पतालों में दवा खरीदी में अनियमितता! थर्ड पार्टी जांच के बिना बांटी जा रही दवाएं। सरकारी अस्पतालों के लिए शासन की दवा खरीदी और वितरण की व्यवस्था में ही गोलमाल है। थर्ड पार्टी से बिना जांच कराए ही दवाइयों का उपयोग शुरू कर दिया जाता है। दवा आपूर्ति करने वाली कंपनी द्वारा दी गई लैब की गुणवत्ता रिपोर्ट को ही सही मानकर दवाओं का उपयोग करने के निर्देश हैं।

ऐसे में अमानक दवा मिलने के बाद उपयोग पर प्रतिबंध लगाने से पूर्व ही एक तिहाई से अधिक दवाएं खप जाती हैं। कारण, सैंपल भेजने से लेकर रिपोर्ट आने तक में तीन से चार माह लग जाते हैं।

दवा आपूर्ति के बाद निर्धारित तापमान में भंडारण नहीं करने से भी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। कई दवा स्टोर का तापमान गर्मी में 35 डिग्री से भी ऊपर रहता है जो कि 25 से 30 के बीच होना चाहिए। इस वर्ष अब तक 13 दवाएं अमानक मिल चुकी हैं, बीते वर्ष पांच मिली थीं।

एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब की गुणवत्ता रिपोर्ट लगाना कंपनियों के लिए अनिवार्य

दरअसल, दवा आपूर्ति करने वाली कंपनी के लिए प्रत्येक बैच की दवा आपूर्ति के साथ नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फार लेबोरेट्रीज (एनएबीएल) मान्यता प्राप्त लैब की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट लगाने की शर्त है। इस कारण सभी कंपनियां इन लैब से सैंपल जांच कराकर दवा के साथ ””ओके”” रिपोर्ट भी भेजती हैं।

Exit mobile version