व्यापार

रसोई पर महंगाई की मार: प्याज के थोक दाम 25% बढ़े; बाजार में राहत के लिए बफर स्टॉक उतारने की तैयारी में सरकार

रसोई पर महंगाई की मार: प्याज के थोक दाम 25% बढ़े; बाजार में राहत के लिए बफर स्टॉक उतारने की तैयारी में सरकार, देश की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में से एक लासलगांव (महाराष्ट्र) में प्याज की थोक कीमतों में अचानक 25 फीसदी तक का उछाल दर्ज किया गया है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले रसोई के बजट पर दबाव बढ़ता देख सरकार हरकत में आ गई है और सितंबर के पहले सप्ताह से अपने बफर स्टॉक (Buffer Stock) से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है।

कीमतों में बढ़ोतरी के आंकड़े: एक नज़र में

  • औसत थोक भाव: लासलगांव मंडी में प्याज का औसत भाव ₹21.50 प्रति किग्रा (5 अगस्त) से बढ़कर ₹27 से ₹28 प्रति किग्रा तक पहुंच गया है।

  • टॉप क्वालिटी प्याज: अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की दरें ₹24/किग्रा से बढ़कर ₹30 से ₹31/किग्रा तक जा पहुंची हैं।

  • खुदरा बाजार असर: दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में खुदरा कीमतें ₹40 से ₹50/किग्रा के पार जाने लगी हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं प्याज के दाम?

  1. खरीफ फसल की बुवाई और आवक में देरी: महाराष्ट्र में मानसून के देर से आने के कारण खरीफ प्याज की बुवाई पिछड़ गई है, जिससे नासिक क्षेत्र से नई फसल आने में देरी होगी।

  2. दक्षिण भारत की फसल पर निर्भरता: कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से आने वाली शुरुआती खरीफ फसल की आवक भी देरी से होने की आशंका है, जिससे मांग और आपूर्ति का अंतर बढ़ गया है।

  3. क्वालिटी में गिरावट: यद्यपि रबी सीजन (मार्च-अप्रैल में स्टोर किया गया प्याज) के स्टॉक की कमी नहीं है, लेकिन इस वर्ष खराब मौसम के कारण भारत सहित दुनिया भर में प्याज की स्टोरेज क्वालिटी प्रभावित हुई है।

सरकार की तैयारी और बफर स्टॉक की स्थिति

  • सितंबर से बफर स्टॉक की बिक्री: सरकार सितंबर के पहले हफ्ते से बफर स्टॉक से प्याज बाजार में बेचकर बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने की योजना बना रही है।

  • खरीद का लक्ष्य छूटा: सरकार ने इस सीजन के लिए 2 लाख टन (2,00,000 टन) प्याज खरीद का लक्ष्य रखा था। हालांकि, 7 बार न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य (Procurement Price) बढ़ाने के बावजूद वास्तविक खरीद लक्ष्य से लगभग 25% कम रहने का अनुमान है।

सितंबर का मौसम तय करेगा आगे का रुख

निर्यातकों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में प्याज की कीमतों का रुख सितंबर महीने की बारिश पर निर्भर करेगा:

  • यदि सितंबर में अधिक बारिश से दक्षिण भारत की खरीफ फसल को नुकसान पहुंचता है, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।

  • यदि मौसम अनुकूल रहता है और नई फसल अच्छी क्वालिटी में आती है, तो बफर स्टॉक की मदद से कीमतें जल्द ही नियंत्रण में आ जाएंगी।

Back to top button