HARTALIKA TEEJ हरतालिका भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र के दिन होता है। इस दिन कुंआरी और सौभाग्यवती स्त्रियां गौरी-शंकर की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है और सौभाग्यवती स्त्रियों का सौभाग्य बढ़ जाता है।
हरतालिका तीज व्रत एवं पूजा का मुहूर्त
- पहला प्रहर शाम 06 बजकर 23 मिनट से रात 09 बजकर 02 मिनट तक
- दूसरा प्रहर रात 09 बजकर 02 मिनट से 19 सितंबर को प्रात: 12 बजकर 15 मिनट तक
- तीसरा प्रहर – प्रात: 12 बजकर 15 मिनट से 19 सितंबर को प्रात: 03 बजकर 12 मिनट तक
- चौथा प्रहर प्रात: 03 बजकर 12 मिनट से 19 सितंबर को सुबह 06 बजकर 08 मिनट तक
हरतालिका तीज व्रत पूजा का तरीका
हरतालिका तीज पर माता पार्वती और भगवान शंकर की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है-
● हरतालिका तीज प्रदोषकाल में किया जाता है। सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है। यह दिन और रात के मिलन का समय होता है।
● हरतालिका पूजन के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा हाथों से बनाएं।
● पूजास्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें और उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
● इसके बाद देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करें
● सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी वस्तु रखकर माता पार्वती को चढ़ाना इस व्रत की मुख्य परंपरा है।
● इसमें शिवजी को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है। यह सुहाग सामग्री सास के चरण स्पर्श करने के बाद ब्राह्मणी और ब्राह्मण को दान देना चाहिए।
