ED Raid: म्यांमार सीमा पर ED का बड़ा एक्शन; अवैध बर्मी सुपारी तस्करी नेटवर्क के 9 ठिकानों पर एक साथ छापा, फर्जी ई-वे बिल से चल रहा था करोड़ों का काला खेल
चम्फाई/आइजोल: भारत की पूर्वोत्तर सीमा पर सक्रिय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराधियों और तस्करों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED – Enforcement Directorate) ने गुरुवार (04 जून) को एक बहुत बड़ा और कड़ा प्रहार किया है। ED की विशेष जांच टीमों ने मिजोरम-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चम्फाई जिले में एक साथ व्यापक छापेमारी अभियान शुरू किया है।
जांच एजेंसी ने तड़के सुबह एक साथ 9 अलग-अलग ठिकानों पर दबिश देते हुए ‘अवैध बर्मी सुपारी’ (Illegal Burmese Supari – सूखी सुपारी) की अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े एक बहुत बड़े और संगठित आपराधिक सिंडिकेट (Organized Network) को सीधे अपने निशाने पर लिया है।
स्थानीय मददगारों और सिंडिकेट के आकाओं पर कड़ा विधिक शिकंजा
खुफिया इनपुट और पूर्व विधिक विन्यास के आधार पर की जा रही यह छापेमारी मुख्य रूप से उन स्थानीय रसूखदार कारोबारियों, बिचौलियों और कथित मददगारों के ठिकानों पर केंद्रित है जो इस सीमा पार तस्करी नेटवर्क को संचालित करने में रीढ़ की हड्डी बने हुए थे:
- परिसरों की तलाशी: ED की टीमें संदिग्धों के आवासीय घरों और उनके व्यावसायिक गोदामों/परिसरों (Commercial Premises) को खंगाल रही हैं।
- मुख्य आरोप: यह गिरोह म्यांमार (Burma) से बिना किसी वैध विधिक परमिट और सीमा शुल्क (Customs Duty) चुकाए, अत्यंत घटिया और अवैध सूखी सुपारी की भारी-भरकम खेप लगातार भारतीय सीमा में धकेल रहा था.
नदी मार्ग से गोदामों तक: म्यांमार से भारत तक बिछा था तस्करी का जाल
ED की शुरुआती वित्तीय और आपराधिक जांच में इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट के पूरे तौर-तरीकों (Modus Operandi) का एक कड़ा और चौंकाने वाला विन्यास सामने आया है
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तियू नदी का अवैध जलमार्ग: म्यांमार से आने वाली अवैध सुपारी की खेपों को दोनों देशों की सीमा पर बहने वाली तियू नदी (Tiau River) के रास्ते रात के अंधेरे में नावों और स्थानीय कुलियों के जरिए चोरी-छिपे भारत में लाया जाता था।
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स्थानीय गोदामों का खेल: सीमा पार कराने के बाद इस अवैध माल को तुरंत चम्फाई के स्थानीय कबाड़ गोदामों में डंप (सुरक्षित) कर दिया जाता था।
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फर्जी ई-वे बिल (Fake E-Way Bills): इन अवैध सुपारियों को वैध दिखाने के लिए आरोपियों द्वारा फर्जी ई-वे बिल और जाली जीएसटी व अन्य विधिक दस्तावेजों का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाता था। दस्तावेज़ों में इसे स्थानीय मिजोरम की खरीद दिखाकर भारतीय परिवहन तंत्र के जरिए देश के अन्य बड़े हिस्सों और गुटका-पान मसाला विनिर्माण बाजारों में खुलेआम भेज दिया जाता था।
ट्राइबल कार्ड का इस्तेमाल और सैकड़ों करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग
जांच एजेंसी के विधिक विन्यास के अनुसार, यह सिर्फ एक सामान्य सीमा पार तस्करी नहीं है, बल्कि इसके पीछे टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का एक बहुत बड़ा तंत्र काम कर रहा था:
स्थानीय पहचान का दुरुपयोग: शुरुआती जांच में यह कड़ा सच सामने आया है कि आरोपियों ने कानून की नजरों से बचने के लिए स्थानीय जनजातीय (Tribal) पहचान का गलत फायदा उठाया। उन्होंने खुद को पूर्वोत्तर का वैध सीमा पार कारोबारी (Border Trader) दर्शाने की कोशिश की, ताकि सुरक्षा बलों को गुमराह किया जा सके।
कस्टम की जब्ती और जाली दस्तावेज: ED ने खुलासा किया है कि जब पूर्व में कस्टम विभाग (Customs Department) ने इस नेटवर्क की सुपारी की कुछ बड़ी खेप जब्त की थीं, तब आरोपियों ने शातिर दिमाग लगाते हुए पुराने, असंबंधित और एक्सपायर हो चुके आयात दस्तावेजों (Import Documents) को पेश कर जब्त माल को विधिक रूप से छुड़ाने का असफल प्रयास भी किया था।
