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Discrimination: नीली आंखों वाली-पतली और गोरी महिलाओं को मिलता है काम! एयरलाइन पर भेदभाव का आरोप, मुकदमा दर्ज

Discrimination: नीली आंखों वाली-पतली और गोरी महिलाओं को मिलता है काम! एयरलाइन पर भेदभाव का आरोप, मुकदमा दर्जयू। नाइटेड एयरलाइंस पर मुकदमा कर भेदभाव का आरोप लगाया गया है। दरअसल, एयरलाइन के दो फ्लाइट अटेंडेट ने दावा किया है उनके साथ रंग-रूप को लेकर भेदभाव किया गया है। उनका कहना है कि लॉस एंजिल्स डोजर्स बेसबॉल टीम की सेवा करने वाली चार्टर उड़ानों पर कुछ आयु समूहों के फ्लाइट अटेंडेंट को प्राथमिकता दी जाती है। इन अटेंडेटों ने शिकायत में दावा किया है कि खिलाड़ियों के लिए पतली, गोरी और नीली आंखों वाली महिलाओं को काम पर रखा जाता है।

इन लोगों ने की शिकायत
50 वर्षीय डॉन टोड और 44 वर्षीय डार्बी क्यूजादा ने यूनाइटेड एयरलाइंस पर मुकदमा किया है। इन्होंने दावा किया है कि कि उनकी बेइज्जती कर उड़ानों से बाहर कर दिया, जबकि बाद में महिला सहकर्मियों को काम पर रख लिया गया क्योंकि वह पतली और कम उम्र की थीं।

 

 

पिछले महीने दर्ज हुआ मुकदमा
25 अक्तूबर को लॉस एंजिल्स काउंटी सुपीरियर कोर्ट में मामले को दायर किया गया था। दोनों महिलाओं ने यूनाइटेड की चार्टर उड़ानों द्वारा भेदभाव कर डोजर्स के लिए अटेंडेट को काम पर रखने और सहकर्मियों द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार को लेकर नस्ल, राष्ट्रीय मूल, धर्म और उम्र के आधार पर उत्पीड़न और भेदभाव का आरोप लगाया।

15 साल से अधिक समय…
मुकदमे के अनुसार, टॉड और क्यूजादा दोनों ने यूनाइटेड के लिए 15 साल से अधिक समय तक काम किया है। वह डोजर्स की उड़ानों के लिए काम करना चाहती थीं, इसके लिए उन्होंने एयरलाइन में एक दशक से अधिक समय तक काम किया। क्योंकि डोजर्स के लिए उन्हीं लोगों को काम पर रखा जाता है, जिन्हें लंबे समय का अनुभव हो। सामान्य की तुलना में इस तरह की उड़ान में तीन गुना अधिक रुपये मिलते हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके पास योग्यता और अनुभव था फिर भी उनके अनुरोधों को अनदेखा कर दिया गया क्योंकि वह सफेद नहीं थे। हालांकि एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, यूनाइटेड एयरलाइंस पर साल 2020 में भी एक ऐसा ही आरोप लगा था, जिसे बाद में सुलझा लिया गया था। अब नए मुकदमे में 2020 के समझौते को आधार के रूप में इस्तेमाल किया गया है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम