Site icon Yashbharat.com

Brain मस्तिष्क संबंधी समस्याएं भी बढ़ा रहा है कोरोना वायरस, चेतना खोने का भी खतरा

Brains

वाशिंगटन । कोरोना वायरस कोविड-19 की चपेट में आने वाले लोगों को खांसी, जुकाम, सीने में जकड़न, सांस लेने में कठिनाई और न्यूमोनिया ही नहीं मस्तिष्क संबंधी गंभीर दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना के कारण लोगों के दिमाग पर असर पड़ने को इंसेफैलोपैथी के नाम से भी जाना जाता है। इसमें लोगों की दिमागी क्षमता प्रभावित होने के साथ ही सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता घट जा रही है। जानिये कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को दूसरी कौन-कौन सी मानसिक परेशानियों का करना पड़ रहा है सामना…

फ्लोरिडा में मरीज ने खोई चेतना

फ्लोरिडा के बोका रैटन अस्पताल में आए 74 वर्षीय एक मरीज का जिक्र करते हुए डाक्टरों ने बताया कि मार्च की शुरुआत में जब मरीज को लाया गया तो इसे खांसी और बुखार की ही शिकायत थी। उसका एक्सरे कराया गया। हालात सामान्य समझकर उसे घर जाने दिया गया। घर में बुखार बढ़ने पर अगले दिन उसे फिर अस्पताल लाया गया। उसकी हालत बिगड़ चुकी थी। सांस लेने की दिक्कत के साथ वह मानसिक चेतना खो चुका था। वह डाक्टरों को अपना नाम तक नहीं बता पा रहा था। उसके हाथ-पांव कांप रहे थे। इस पर डाक्टरों को शक हुआ कि वह कोविड-19 की चपेट में है। जांच में डाक्टरों का शक सही निकला।

 

मृत पाई गईं दिमाग की कोशिकाएं

इसी तरह मंगलवार को डाक्टरों ने डेट्रायट की एक महिला मरीज के बारे में चौंकाने वाली जानकारी दी। एक एयरलाइन में काम करने वाली पचास वर्षीय महिला पिछले कुछ दिनों से कोरोना की चपेट में है। इसके सिर में दर्द रहने से यह भ्रम की शिकार हो गई है। यह डाक्टरों को अपना नाम भी नहीं बता पा रही है। उसे समय का भी कोई भान नहीं रह गया है। उसके मस्तिष्क की स्कैनिंग करने पर कई हिस्सों में सूजन मिली। इन हिस्सों में कुछ कोशिकाएं (सेल) मृत भी पाई गईं। डाक्टरों ने इस दशा को काफी गंभीर बताते हुए इसे एक्यूट नेक्रोटाइजिंग इंसेफैलोपैथी का नाम दिया। यह दशा इंफ्लुएंजा जैसे वायरल संक्रमण के बिगड़ने के कारण पैदा होती है।

पक्षाघात, सुन्नपन, रक्त के थक्के बनने के लक्षण

हेनरी फोर्ड हेल्थ सिस्टम की डाक्टर इलिजा फोरी ने एक ईमेल संदेश में बताया कि इस महिला मरीज की हालत खराब है। इस केस से साबित होता है कि कुछ परिस्थितियों में वायरस सीधे दिमाग पर हमला कर सकता है। अमेरिकी डाकटरों की ही तरह इटली और अन्य देशों के डाक्टरों ने भी यह पाया है कि कोविड-19 कुछ मरीजों के दिमाग पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। कोरोना पीडि़त कई मरीजों में पक्षाघात, सुन्नपन, रक्त के थक्के बनने के लक्षण मिले है। चिकित्सा विज्ञान में इन्हें एक्रोपैरेस्थेशिया भी कहा जाता है। कुछ मामलों में तो लोगों को बुखार चढ़ने और सांस की तकलीफ होने से पहले ही दिमागी हालत बिगड़ गई।

 

संज्ञाशून्य हो गए ये मरीज

इटली के ब्रेसिया शहर में ऐसे मरीजों का इलाज करने के लिए डाक्टर अलेज्रांदो पैडोवनी को अलग न्यूरोकोविड यूनिट बनानी पड़ी। इलाज के लिए लाए गए इंसेफैलोपैथी के लक्षण वाले ज्यादातर मरीज भ्रमित और संज्ञाशून्य थे। ये कुछ बता नहीं पा रहे थे। इनमें से तो कई बेहोश भी हो जा रहे थे। विशेषज्ञों ने इस तरह के मरीजों का इलाज कर रहे डाक्टरों और अन्य चिकित्साकर्मियों को संक्रमण में आने से सावधान किया है। इस संबंध में पीट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के स्कूल आफ मेडिसिन के न्यूरोलाजिस्ट डा. शेरी एच. वाई चाऊ ने कहा कि इस वायरस के न्यूरो सिस्टम पर पड़ने वाले असर के बारे में अभी बहुत कुछ पता करना है।

 

चीन के विशेषज्ञों ने लगाई मुहर

उधर कई विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के ज्यादातर मरीजों की दिमागी हालत सामान्य रहती है। इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। बाल्टीमोर के जान हापकिंस स्कूल आफ मेडिसिंस (Johns Hopkins University School of Medicine) के डा. राबर्ट स्टीवेंस ने बताया कि वे जिन मरीजों पर रिसर्च कर रहे हैं वे पूरे होश में रहते हैं और आसपास के माहौल से वाकिफ रहते हैं। हालांकि एक रिसर्च पेपर में चीनी विशेषज्ञों ने कहा है कि कोरोना वायरस श्वसन तंत्र में ही सीमित नही रहता बल्कि कुछ मरीजों में उनके दिमाग पर असर डालता है।

Exit mobile version