‘बॉक्स ऑफिस की सफलता बेमानी हो गई थी’: जब 3 साल के बेटे के कैंसर ने बदल दी इमरान हाशमी की जिंदगी, लंच डेट पर मिला था वो खौफनाक संकेत
भोपाल / मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी इन दिनों अपनी फिल्म ‘आवारापन 2’ की बंपर सफलता का जश्न मना रहे हैं। फिल्म दुनिया भर में ₹100 करोड़ से अधिक का शानदार बिजनेस कर चुकी है। हालांकि, इस सुनहरे व्यावसायिक दौर के बीच इमरान ने अपने जीवन के उस सबसे काले और कठिन दौर को याद किया है, जब काम की सफलता उनके लिए बेमानी हो गई थी।
हाल ही में रणवीर इल्लाहाबादिया को दिए एक इंटरव्यू में इमरान ने साल 2014 में अपने महज तीन साल के बेटे अयान को हुए कैंसर (विल्म्स ट्यूमर) और पांच साल लंबे चले उस खौफनाक संघर्ष पर खुलकर बात की है।
एक पिज्जा डेट और 12 घंटे में पलट गई हंसती-खेलती दुनिया
इमरान ने बताया कि 13 जनवरी 2014 का दिन उनके परिवार के लिए जिंदगी भर न भूलने वाला दिन बन गया।
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पहला संकेत: इमरान अपने बेटे अयान के साथ पिज्जा खा रहे थे, तभी अयान ने वॉशरूम जाने की बात कही। वॉशरूम में बच्चे के पेशाब में खून दिखना इस जानलेवा बीमारी का पहला लक्षण था।
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कैंसर की पुष्टि: बिना किसी शुरुआती लक्षण के सामने आई इस स्थिति के बाद परिजन महज तीन घंटे में डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टर्स ने जांच के बाद साफ कर दिया कि मासूम अयान को ‘विल्म्स ट्यूमर’ है, जो बच्चों में होने वाला एक प्रकार का किडनी कैंसर है।
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तत्काल सर्जरी: अगले ही दिन सुबह अयान की सर्जरी और कीमोथेरेपी शुरू कर दी गई। 12 घंटों के भीतर इमरान और उनकी पत्नी परवीन की दुनिया पूरी तरह से उजड़ती महसूस होने लगी।
बेटे के सामने नहीं रोए, दूसरे कमरे में जाकर फूटा दर्द
इमरान ने याद करते हुए बताया कि 2003 में अपने करियर की शुरुआत के बाद वे सफलता के शिखर पर थे, लेकिन इस खबर ने उन्हें किसी कंक्रीट की दीवार से टकराने जैसा झटका दिया।
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खुद को संभाला: मासूम बेटे का मनोबल न टूटे, इसके लिए इमरान और उनकी पत्नी डॉक्टर के सामने बिल्कुल शांत रहे। वे अयान को अकेला छोड़कर दूसरे कमरे में गए और वहां जाकर फूट-फूटकर रोए।
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कीमोथेरेपी का दर्द: शुरुआती एक हफ्ता बहुत भारी बीता, लेकिन उसके बाद दोनों ने बेटे के सामने हिम्मत बनाए रखी। 6 महीने तक अयान दर्दनाक सर्जरी और कीमोथेरेपी से गुजरा।
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5 साल तक डर का साया: कैंसर के दोबारा लौटने की आशंका के कारण अगले 5 सालों तक हर तीन महीने में अयान के नियमित मेडिकल टेस्ट किए जाते रहे।
ज्ञान को बनाया हथियार, लिखी किताब ‘द किस ऑफ लाइफ’
बेटे के इलाज के दौरान इमरान ने हार मानने की जगह मेडिकल किताबों और कैंसर रिसर्च आर्टिकल्स को गहराई से पढ़ना शुरू कर दिया। वे डॉक्टर्स से भी इस बीमारी की बारीकियों पर चर्चा करने लगे थे।
इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने ‘द किस ऑफ लाइफ: हाउ ए सुपरहीरो एंड माई सन डिफीटेड कैंसर’ नाम से एक किताब लिखी। इसका मकसद उन माता-पिता को हिम्मत देना था, जो बच्चों के कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे हैं।
एक के बाद एक टूटे दुखों के पहाड़
बेटे के इलाज के इस लंबे दौर के बीच ही इमरान पर दुखों का एक और पहाड़ टूट पड़ा। कुछ ही समय बाद उनकी मां को भी कैंसर का पता चला और महज 6 महीने में उनका निधन हो गया। इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी दादी को भी खो दिया।
इमरान कहते हैं कि इन 6-7 सालों के कठिन संघर्ष ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद मजबूत बना दिया और सिखाया कि परिस्थितियां कितनी भी बुरी हों, उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। ‘महाकाली’ से तेलुगु सिनेमा में कदम रखेंगे अक्षय खन्ना: ‘शुक्राचार्य’ के रूप में खौफनाक पहला लुक वायरल; 24 अगस्त को आएगी पहली झलक
