पश्चिम बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ा खेला-टीएमसी के 23 सांसद बागी गुट के संपर्क में; जानिए क्या गिरने वाली है दलबदल कानून की गाज?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ा खेला-टीएमसी के 23 सांसद बागी गुट के संपर्क में; जानिए क्या गिरने वाली है दलबदल कानून की गाज?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ा खेला-टीएमसी के 23 सांसद बागी गुट के संपर्क में; जानिए क्या गिरने वाली है दलबदल कानून की गाज?

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक बहुत ही कड़ा और अप्रत्याशित आंतरिक संकट गहरा गया है. राजनीतिक गलियारों से आ रही पुख्ता खबरों के अनुसार, टीएमसी के 23 मौजूदा सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कड़ा और बागी रुख अख्तियार कर लिया है.

संसदीय इतिहास में तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह अब तक का सबसे बड़ा विद्रोही विन्यास माना जा रहा है, जिसने न केवल कोलकाता के ‘नबन्ना’ (सचिवालय) बल्कि दिल्ली के सियासी हलकों में भी कड़ा हड़कंप मचा दिया है.

क्यों बागी हुए 23 सांसद? मुख्य राजनैतिक समीकरण

सूत्रों और राजनैतिक विश्लेषकों से मिले लाइव इनपुट के मुताबिक, इन 23 सांसदों की कड़क नाराजगी के पीछे कई आंतरिक विधिक और सांगठनिक कारण बताए जा रहे हैं

  1. पार्टी के भीतर कड़ा आंतरिक टकराव: पिछले कुछ समय से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, टिकट वितरण के विन्यास और सांगठनिक फैसलों को लेकर इन सांसदों में कड़ा असंतोष पनप रहा था.

  2. नीतियों पर विधिक असहमति: बागी गुट के कुछ सांसदों का मानना है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दों पर पार्टी का स्टैंड उनके संसदीय क्षेत्रों के विन्यास से मेल नहीं खा रहा था. पश्चिम बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ा खेला-टीएमसी के 23 सांसद बागी गुट के संपर्क में; जानिए क्या गिरने वाली है दलबदल कानून की गाज?

  3. संसदीय विन्यास में दरार: यदि ये 23 सांसद विधिक रूप से एक अलग गुट बनाते हैं या संसद में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हैं, तो लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में टीएमसी का संख्या बल कड़ाई से प्रभावित हो सकता है.

🛡️ सुरक्षा और विधिक दलबदल कानून की तलवार: इस बड़े विद्रोह के बाद अब सभी की नजरें देश के कड़े दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) पर टिक गई हैं. विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, बागी सांसदों को संसद में अपनी सदस्यता सुरक्षित रखने के लिए कुल विधायी दल के $two-thirds$ ($2/3$) सदस्यों के कड़े समर्थन की आवश्यकता होगी, अन्यथा उन पर अयोग्यता की विधिक गाज गिर सकती है.

ममता बनर्जी और शीर्ष कमान का ‘एक्शन प्लान’

इस कड़े राजनीतिक विस्फोट के बाद टीएमसी सुप्रीमो और शीर्ष रणनीतिकारों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन विन्यास शुरू कर दिया है:

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