नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों तक इस वक्त बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर चल रही अंदरूनी कलह अब एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल चुकी है। बुधवार को ममता बनर्जी की पार्टी को उस वक्त एक और तगड़ा झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने तृणमूल कांग्रेस और संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) से इस्तीफे का एलान कर दिया।TMC राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, असम के CM हिमंता से मिलीं; एक हफ्ते में दूसरा बड़ा झटका
इस इस्तीफे के तुरंत बाद सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की है, जिसके बाद उनके बीजेपी (BJP) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
क्विक फैक्ट: TMC में ‘हफ्तेभर’ का संकट
- इस्तीफा देने वालीं सांसद: सुष्मिता देव (राज्यसभा सांसद)
- 7 दिन में दूसरा बड़ा झटका: सुखेंदु शेखर राय के बाद सुष्मिता देव इस्तीफा देने वालीं एक हफ्ते में दूसरी सांसद हैं।
- इस्तीफे का समय: आज दोपहर 1:00 बजे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मिलकर वे अपना इस्तीफा सौंपेंगी।
- संकट की वजह: पार्टी के अंदर बढ़ा भारी असंतोष और सांसदों का NDA (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस) की तरफ झुकाव।
काकोली घोष दस्तीदार के दावे से मंचा हड़कंप: 20 सांसद लाइन में!
TMC में मची इस बगावत की जमीन सोमवार को ही तैयार हो गई थी। बागी गुट की अगुवाई कर रही टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने एक सनसनीखेज दावा किया था।
- दस्तीदार के मुताबिक, टीएमसी के लगभग 20 सांसदों ने एनडीए (NDA) के साथ जुड़ने की इच्छा जताई है।
- इस संबंध में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक गोपनीय पत्र भी सौंपा जा चुका है।
- नया पावर सेंटर: टीएमसी के इस बागी गुट ने अपनी अलग टीम भी बना ली है, जिसमें काकोली घोष दस्तीदार को ‘चीफ व्हिप’ और सीनियर सांसद शताब्दी रॉय को ‘डिप्टी लीडर’ बनाया गया है।
बंगाल की बगावत से दिल्ली में हलचल: खाली हुआ ‘TMC का मुख्य केंद्र’
इस सियासी ड्रामे का असर दिल्ली में साफ दिखने लगा है। बगावत के बीच, टीएमसी सांसद पार्थ भौमिक ने मंगलवार को दिल्ली स्थित उस सरकारी बंगले को आधिकारिक तौर पर छोड़ दिया, जो राजधानी में तृणमूल कांग्रेस के कामकाज और बैठकों का मुख्य हब (केंद्र) हुआ करता था। सूत्रों के अनुसार, भौमिक ने खुद ही इस बंगले से हटने की गुजारिश की थी, जो यह साफ दर्शाता है कि लीडरशिप और सांसदों के बीच की खाई अब पाटी नहीं जा सकती।
टीएमसी लीडरशिप का तीखा पलटवार: “हिम्मत है तो पद छोड़ें”
पार्टी में मचे इस घमासान पर ममता बनर्जी के सिपहसालार और सीनियर नेता कल्याण बनर्जी ने बागी गुट को दोटूक चेतावनी दी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बनर्जी ने कहा:
“जो नेता पार्टी से नाखुश हैं और संगठन का सार्वजनिक रूप से विरोध कर रहे हैं, उन्हें नैतिक रूप से तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर कोई अब तृणमूल कांग्रेस के साथ नहीं रहना चाहता, तो नैतिक रूप से सही कदम यही होगा कि वे पद छोड़ें, न कि पीठ में छुरा घोंपें।”
यशभारत विश्लेषण: एक के बाद एक सांसदों के इस्तीफे और 20 सांसदों के पाला बदलने के दावों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सुष्मिता देव का असम के सीएम से मिलना इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल और दिल्ली की राजनीति में और बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।








