शस्त्र लाइसेंस कोई खिलौना नहीं, कारतूसों का पाई-पाई हिसाब जरूरी- हर्ष फायरिंग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
हथियार शादी में चलाने के लिए नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कारतूसों का हिसाब न देने पर रद्द होगा लाइसेंस
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शस्त्र लाइसेंस कोई खिलौना नहीं, कारतूसों का पाई-पाई हिसाब जरूरी- हर्ष फायरिंग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हथियारों के लाइसेंस और उनके इस्तेमाल को लेकर एक बेहद सख्त और दूरगामी फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करना एक विशेष अधिकार है, न कि खुशी का प्रदर्शन करने का जरिया। अदालत ने ताकीद की है कि लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल शादी-विवाह या धार्मिक आयोजनों में ‘हर्ष फायरिंग’ (Celebratory Firing) के लिए बिल्कुल नहीं किया जा सकता।
जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि हर लाइसेंस धारक का यह कानूनी और नैतिक कर्तव्य है कि वह खरीदे गए और इस्तेमाल किए गए सभी कारतूसों का पूरा हिसाब-किताब रखे।
857 में से 757 कारतूसों का नहीं मिला हिसाब, याचिका खारिज
यह पूरा मामला याचिकाकर्ता अखिलेश कुमार से जुड़ा हुआ है, जिनका शस्त्र लाइसेंस प्रशासन ने रद्द कर दिया था:
भारी संख्या में कारतूस गायब: प्रशासन की जांच में पाया गया था कि याची के पास कुल 857 कारतूसों में से 757 कारतूसों का कोई हिसाब या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
लाइसेंस रद्द को दी थी चुनौती: प्रशासन द्वारा लाइसेंस रद्द किए जाने के फैसले को याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट का सख्त रुख: कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में कारतूसों का हिसाब न होना और हर्ष फायरिंग के लिए उनका इस्तेमाल करना लाइसेंस की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।
हर्ष फायरिंग से होने वाले हादसों पर जताई चिंता
अदालत ने देश भर में शादी-ब्याह और जन्मदिन समारोहों में होने वाली हर्ष फायरिंग की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की।
हाल ही में दिसंबर 2025 में नोएडा सेक्टर 93 के एक बारात घर में शादी समारोह के दौरान एक शख्स से पिस्टल लोड करते वक्त अचानक फायर हो गया था, जिससे अफरा-तफरी मच गई थी और मेहमान बाल-बाल बचे थे।
देश भर से अक्सर ऐसी दुखद खबरें आती रहती हैं जहाँ खुशी के माहौल में की गई अंधाधुंध फायरिंग में बेकसूर लोगों की जान चली जाती है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद लोग नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाते हैं, जिस पर अब हाई कोर्ट ने नकेल कसी है। शस्त्र लाइसेंस कोई खिलौना नहीं, कारतूसों का पाई-पाई हिसाब जरूरी- हर्ष फायरिंग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला