Air Fryer & Cancer Myth: क्या एयर फ्रायर में बना खाना खाने से होता है कैंसर? मशहूर डॉक्टर ने यूट्यूब पर खोला राज; जानें इसके पीछे का पूरा सच
भोपाल: आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर काफी सजग (Health Conscious) हो गए हैं। यही वजह है कि मिडिल क्लास परिवारों में भी डीप फ्राई या ऑयली खाने की जगह ‘एयर फ्रायर’ (Air Fryer) का क्रेज तेजी से बढ़ा है। बिना तेल या नाममात्र के तेल में कुरकुरा और स्वादिष्ट खाना बनाने वाले इस गैजेट को लेकर हाल ही में एक डराने वाली अफवाह उड़ी कि इसके इस्तेमाल से ‘कैंसर’ का खतरा बढ़ जाता है।
इस अफवाह के पीछे का सच क्या है? कैंसर हीलर सेंटर के डायरेक्टर डॉ. तरंग कृष्णा ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर कर इस बात का पूरा वैज्ञानिक सच देश के सामने रखा है। आइए जानते हैं कि एयर फ्रायर सेहत के लिए वरदान है या वाकई कोई खतरा?
क्या है एयर फ्रायर और कैसे काम करता है?
कई लोग एयर फ्रायर को माइक्रोवेव की तरह समझते हैं, लेकिन इसका साइंस बिल्कुल अलग है:
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कन्वेक्शन ओवन तकनीक: एयर फ्रायर असल में एक छोटा कन्वेक्शन ओवन है, जो अपने अंदर बेहद गर्म हवा (Hot Air) को तेजी से सर्कुलेट करता है। यह गर्म हवा खाने के चारों तरफ फैलकर उसे बिना तेल के भी कुरकुरा और क्रिस्पी बना देती है।
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कोई रेडिएशन नहीं: साइंस के मुताबिक, एयर फ्रायर में से किसी भी तरह की खतरनाक रेडिएशन या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें (Res) नहीं निकलती हैं। यह सिर्फ और सिर्फ प्योर हीट यानी गर्मी पर काम करता है। कढ़ाई में तलने के मुकाबले इसमें 80 प्रतिशत से भी कम तेल का इस्तेमाल होता है।
डॉक्टर की राय: एयर फ्रायर में खाना पकाना है 100% सुरक्षित
डॉ. तरंग कृष्णा के अनुसार, एयर फ्रायर में खाना बनाना सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित और फायदेमंद है:
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मोटापे से बचाव: चूंकि इसमें तेल न के बराबर लगता है, इसलिए शरीर में कैलोरी बहुत कम जाती है। इससे लोग मोटापे (Obesity) का शिकार होने से बच जाते हैं, जो खुद कई गंभीर बीमारियों की जड़ है। Air Fryer & Cancer Myth: क्या एयर फ्रायर में बना खाना खाने से होता है कैंसर? मशहूर डॉक्टर ने यूट्यूब पर खोला राज; जानें इसके पीछे का पूरा सच
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दिल के लिए बेहतर: कम तेल का मतलब है बैड कोलेस्ट्रॉल पर कंट्रोल, जो दिल की सेहत को दुरुस्त रखता है।
फिर कैंसर की अफवाह कहाँ से उड़ी? जानिए ‘एक्रिलामाइड’ का सच
अगर यह सुरक्षित है, तो कैंसर का नाम इसके साथ क्यों जुड़ा? इसके पीछे एक खास केमिकल रिएक्शन है:
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एक्रिलामाइड केमिकल (Acrylamide): जब भी स्टार्च वाले फूड्स (जैसे आलू, ब्रेड या चिप्स) को बहुत ज्यादा हाई टेम्प्रेचर पर पकाया जाता है, तो एक केमिकल रिएक्शन के कारण ‘एक्रिलामाइड’ नाम का तत्व बनता है।
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क्या कहता है रिसर्च? ‘इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर’ ने जानवरों पर किए गए एक अध्ययन में एक्रिलामाइड को कैंसर का कारक माना था। लेकिन, इंसानों में भोजन के जरिए जाने वाले एक्रिलामाइड और कैंसर के बीच आज तक कोई सीधा संबंध या प्रमाण नहीं मिला है।
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1 लाख लोगों पर महा-स्टडी: साल 2024 में 1 लाख से भी ज्यादा लोगों पर एयर फ्रायर के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ी वैज्ञानिक स्टडी की गई थी, जिसमें लोगों के अंदर कैंसर का कोई भी रिस्क या लक्षण नहीं पाया गया।
🛑 भूलकर भी न करें ये गलती, वरना सेहत को होगा नुकसान!
डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि एयर फ्रायर सुरक्षित जरूर है, लेकिन इसके इस्तेमाल का तरीका सही होना चाहिए:
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ओवर कुकिंग से बचें: जब आप एयर फ्रायर में खाने को बहुत ज्यादा देर तक पकाते हैं (Overcooking) या उसे जरूरत से ज्यादा काला/ब्राउन (जला हुआ) कर देते हैं, तब उसमें एक्रिलामाइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ जाती है।
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गोल्डन रूल: एयर फ्रायर में खाना बनाते समय टाइमर और टेम्प्रेचर का ध्यान रखें। खाने को सिर्फ हल्का क्रिस्पी या लाइट गोल्डन होने तक ही पकाएं, उसे जरूरत से ज्यादा डार्क ब्राउन न होने दें।
