Thursday, April 30, 2026
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मध्यप्रदेश

72 साल की हैं लक्ष्मी, हवा की तरह टाइपिंग मशीन पर चलती हैं इनकी उंगलियां

नयूज डेस्‍क। वृद्धावस्था तक पहुंचते-पहुंचते शरीर जब खाट पर लेटे हाथों में पानी का गिलास और मुंह तक खाने के निवाले चाहता हो, तो उस अवस्था में कोई बुजुर्ग कुछ अलग करते दिख जाए तो आश्चर्य होता है. ऐसी ही अवस्था में एक बुजुर्ग महिला ऐसी भी हैtavite

जो अपनी दिव्यांग बेटी के लिए ना केवल कठिन परिश्रम करती हैं, बल्कि हवा की तरह टाइपिंग मशीन में टाइप कर दो जून की रोटी जुटा लेती हैं.

इस बुजुर्ग महिला के हाथ टाइपिंग में इतने तेज हैं कि हर कोई हैरान, इनसे हर कोई मिलना चाहता है और देखना चाहता है कि कैसे इतनी तेज टाइप कर लेती हैं. जब इनकी खबर समाचार की सुर्खियां बनी तो क्रिकेटर वीरेन्द्र सहवाग ने भी इस बुजुर्ग को ट्वीट कर सलाम किया.

सीहोर के कलेक्ट्रेट दफ्तर के बाहर आवेदन टाइप करती 72 साल की लक्ष्मी यूं तो इंदौर की रहने वाली हैं, लेकिन गुंडों और दबंगों के कारण उनके जीवन में ऐसा अंधेरा छाया कि पति की मृत्यु हो गई. एक जवान बेटी की लाज बचाते दुर्घटना में उसका पैर जांघ के पास से कट गया, तभी से बेटी मानसिक अवसाद का जीवन जीती बस कमरे और खाने के लिए सड़को पर आती है.

ऐसे में सीहोर पहुंची लक्ष्मी को तत्कालीन कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने उनके टाइपिंग हुनर के आधार कलेक्ट्रेट दफ्तर के बाहर आवेदन टाइप करने के लिए एक पुरानी टाइपिंग मशीन और बैठने के लिए एक कुर्सी और टेबल की व्यवस्था कर दी..

प्रशासन की सहूलियत पाकर लक्ष्मी को गुजारे के लिए इस जुगत ने एक नई उम्मीद दे दी और लक्ष्मी की उंगलियां हवा की तरह मशीन पर चलती हैं. लोगों के आवेदन बनाने के लिए विख्यात हो गई. झुर्रीदार शरीर और कंपकपाते पगों के वाबजूद भी यह अपनी साईकल से हर रोज कलेक्ट्रेट पहुंचती हैं.

सीहोर के कलेक्ट्रेट दफ्तर के बाहर आवेदन टाइप करती 72 साल की लक्ष्मी बताती हैं कि सोमवार और मंगलवार को बहुत काम करना पड़ता है, बस अपनी अपाहिज बच्ची के सपनों को पूरा करने के लिए पैसा निकल आता है.

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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