18 करोड़ का ‘ऐशबाग 90 डिग्री ओवरब्रिज’ धूल खाने को मजबूर; रेलवे ने PWD के पाले में डाली गेंद, फिर भी काम बंद

18 करोड़ का 'ऐशबाग 90 डिग्री ओवरब्रिज' धूल खाने को मजबूर; रेलवे ने PWD के पाले में डाली गेंद, फिर भी काम बंद

18 करोड़ का ‘ऐशबाग 90 डिग्री ओवरब्रिज’ धूल खाने को मजबूर; रेलवे ने PWD के पाले में डाली गेंद, फिर भी काम बंद

भोपाल: भोपाल का बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित ऐशबाग 90 डिग्री ओवरब्रिज सरकारी लेत-लतीफी, आपसी तालमेल की कमी और अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों की भेंट चढ़ चुका है। करीब 18 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से जून 2025 में बनकर तैयार हुआ यह ओवरब्रिज आज एक साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी बंद पड़ा है।

हैरान करने वाली बात यह है कि तीन महीने पहले जिस सुधारात्मक डिजाइन पर दोनों संबंधित विभागों में पूरी सहमति बन चुकी थी, उसे लेकर अब लोक निर्माण विभाग (PWD) और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं। अफसरों के इन विरोधाभासी दावों और सुस्त रवैये के कारण जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये धूल खा रहे हैं, जबकि स्थानीय लोग रोजाना भीषण ट्रैफिक जाम से जूझने को विवश हैं।

 रेलवे का दावा: “हमारी तरफ से हरी झंडी, PWD शुरू करे काम”

इस पूरे गतिरोध में रेलवे ने अपना पक्ष पूरी तरह साफ करते हुए पूरी जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी (PWD) के पाले में डाल दी है।

 जाम से बेहाल जनता, धूल फांकता करोड़ों का प्रोजेक्ट

ऐशबाग रेलवे क्रॉसिंग के आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को उम्मीद थी कि इस ओवरब्रिज के बनने के बाद उन्हें रोजाना लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन पुल बनने के एक साल बाद भी इसे आम जनता के लिए खोला नहीं जा सका है।

पुल की 90 डिग्री की तीखी और खतरनाक घुमावदार डिजाइन को लेकर पहले भी तकनीकी सवाल खड़े हुए थे, जिसके बाद इसमें सुधार का फैसला लिया गया। मगर अब जब सुधार की बारी आई है, तो सरकारी विभागों के बीच की खींचतान और आपसी ‘ईगो’ के कारण काम धरातल पर शुरू ही नहीं हो पा रहा है।

-यशभारत डॉट कॉम

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