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नई कार खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर: सरकार ला रही है CAFE-III नियम; बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की कीमतें, पर मिलेगा बंपर माइलेज

New Renault Triber car

नई कार खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर: सरकार ला रही है CAFE-III नियम; बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की कीमतें, पर मिलेगा बंपर माइलेज

नई दिल्ली/ऑटो डेस्क: अगर आप भी अगले कुछ सालों में अपने लिए एक नई पेट्रोल या डीजल कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार ने देश में प्रदूषण कम करने और गाड़ियों का माइलेज सुधारने के लिए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE)-III के नए ड्राफ्ट नियमों का मसौदा जारी कर दिया है। नई कार खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर: सरकार ला रही है CAFE-III नियम; बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की कीमतें, पर मिलेगा बंपर माइलेज

प्रस्तावित नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होने जा रहे हैं, जो अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेंगे। ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन कड़े नियमों को पूरा करने के लिए कार कंपनियों को अपनी गाड़ियों में नई और महंगी तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा, जिससे आने वाले समय में कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

क्या हैं CAFE-III के नए नियम और लक्ष्य?

CAFE नियमों का मुख्य उद्देश्य वाहन निर्माताओं (ऑटो कंपनियों) की पूरी कार लाइन-अप (पोर्टफोलियो) के औसत ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करना है।

$$\text{वर्ष 2027-28 का लक्ष्य: } 3.996 \text{ लीटर / 100 किमी}$$
$$\text{वर्ष 2031-32 का लक्ष्य: } 3.3273 \text{ लीटर / 100 किमी}$$

यानी आने वाले समय में कंपनियों को ऐसी कारें बनानी होंगी जो कम से कम ईंधन में ज्यादा से ज्यादा दूरी तय कर सकें (यानी माइलेज बहुत ज्यादा हो)। इसके साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के उत्सर्जन को भी लगातार कम करना अनिवार्य होगा।

 ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने पर मिलेगा ‘इंसेंटिव’ का फायदा

नए नियमों में सरकार ने पर्यावरण के अनुकूल चलने वाली गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं:

 नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना: ‘क्रेडिट-डेबिट’ सिस्टम लागू

ड्राफ्ट नियमों के तहत कंपनियों के प्रदर्शन को मापने के लिए एक अनोखा क्रेडिट और डेबिट सिस्टम तैयार किया गया है:

 आम ग्राहकों की जेब पर क्या होगा असर?

इस पूरे बदलाव का सीधा असर ग्राहकों और उनके बजट पर देखने को मिलेगा:

अल्पकालिक नुकसान (शुरुआती झटका): नए कड़े मानकों को हासिल करने के लिए ऑटो कंपनियों को इंजन री-इंजीनियरिंग और हाइब्रिड तकनीकों में भारी निवेश करना होगा। इस कारण पेट्रोल और डीजल कारों की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमतें बढ़ सकती हैं।

दीर्घकालिक फायदा (लॉन्ग-टर्म सेविंग्स): बढ़ी हुई कीमतों के बदले ग्राहकों को ऐसी कारें मिलेंगी जिनका माइलेज बेहद शानदार होगा और वे प्रदूषण भी नाममात्र का करेंगी। इससे लंबे समय में आपका पेट्रोल-डीजल पर होने वाला मासिक खर्च काफी कम हो जाएगा।

— ऑटोमोबाइल डेस्क, यशभारत डॉट कॉम

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