महंगाई का यू-टर्न: 4% के पार पहुंचा रिटेल इंफ्लेशन; RBI के सामने बड़ा धर्मसंकट, क्या महंगी होगी आपकी EMI?

महंगाई का यू-टर्न: 4% के पार पहुंचा रिटेल इंफ्लेशन; RBI के सामने बड़ा धर्मसंकट, क्या महंगी होगी आपकी EMI?

महंगाई का यू-टर्न: 4% के पार पहुंचा रिटेल इंफ्लेशन; RBI के सामने बड़ा धर्मसंकट, क्या महंगी होगी आपकी EMI?

नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के मोर्चे पर एक बार फिर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं. आम जनता को राहत मिलने के बजाय खुदरा महंगाई (Retail Inflation) ने एक बार फिर जोरदार वापसी की है और इसके आंकड़े 4 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गए हैं. महंगाई के इस यू-टर्न ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने एक नई धर्मसंकट की स्थिति पैदा कर दी है.

अब बाजार में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या रिजर्व बैंक आगामी मॉनेटरी पॉलिसी (MPC) की बैठक में ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी करेगा, या फिर आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने के लिए दरों को जस का तस छोड़ देगा? आइए समझते हैं इस पूरी इकॉनमी का गणित.

कितना रहा रिटेल इंफ्लेशन? (आंकड़ों की जुबानी)

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाने-पीने की चीज़ें महंगी होने की वजह से खुदरा महंगाई दर में यह उछाल आया है.

RBI के सामने क्या है बड़ा धर्मसंकट?

महंगाई के इस यू-टर्न से रिजर्व बैंक के सामने ‘कुआं और खाई’ जैसी स्थिति बन गई है:

  1. महंगाई पर लगाम (ब्याज दरें बढ़ाना): अगर केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू में करने को प्राथमिकता देता है, तो उसे बाजार में लिक्विडिटी (पैसे के बहाव) को कम करने के लिए रेपो रेट (Repo Rate) में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है.

  2. आर्थिक विकास की रफ्तार (दरें स्थिर रखना): दूसरी तरफ, अगर ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं, तो पर्सनल लोन, कार लोन और होम लोन महंगे हो जाएंगे. इससे आम कंज्यूमर्स की खर्च करने की क्षमता घटेगी, जिससे आर्थिक विकास (Economic Growth) की रफ्तार धीमी होने का जोखिम रहता है.

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को झटका: बाजार में लंबे समय से यह उम्मीद जताई जा रही थी कि अगर महंगाई काबू में रही, तो RBI रेपो रेट में कटौती करके आम जनता को लोन और EMI पर राहत देगा. लेकिन आंकड़ों के 4 फीसदी के पार जाते ही इस उम्मीद पर फिलहाल पानी फिरता नजर आ रहा है.

 आम जनता और आपकी जेब पर क्या होगा असर?

अगर रिजर्व बैंक महंगाई के दबाव में आकर सख्त रुख अपनाता है, तो आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा: महंगाई का यू-टर्न: 4% के पार पहुंचा रिटेल इंफ्लेशन; RBI के सामने बड़ा धर्मसंकट, क्या महंगी होगी आपकी EMI?

इन दो अनिश्चितताओं पर टिकी है नजरें

आर्थिक जानकारों के मुताबिक, आगे की राह इन दो बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी:

एक्सपर्ट्स का क्या है मानना?

अधिकांश आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि RBI तुरंत ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला नहीं लेगा. केंद्रीय बैंक अभी ‘वेट एंड वॉच’ (देखो और इंतजार करो) की नीति अपना सकता है. हालांकि, दरों में कटौती की संभावना अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी है और सख्त मौद्रिक रुख (Hawkish Stance) आगे भी जारी रहने की उम्मीद है. अब सबकी नजरें रिजर्व बैंक की अगली पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं.

– यशभारत डॉट कॉम

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