सावधान! ‘Zero Down Payment’ पर कार खरीदने से पहले जान लें ये कड़वा सच, फायदे से ज्यादा हो सकता है नुकसान

सावधान! 'Zero Down Payment' पर कार खरीदने से पहले जान लें ये कड़वा सच, फायदे से ज्यादा हो सकता है नुकसान

सावधान! ‘Zero Down Payment’ पर कार खरीदने से पहले जान लें ये कड़वा सच, फायदे से ज्यादा हो सकता है नुकसान

नई दिल्ली: आजकल ऑटोमोबाइल बाजार में कार कंपनियां और बैंक मिलकर ग्राहकों को लुभाने के लिए एक बेहद आकर्षक ऑफर दे रहे हैं—‘जीरो डाउन पेमेंट कार लोन’ (Zero Down Payment Car Loan)। विज्ञापन में दावा किया जाता है कि जेब से बिना एक भी रुपया दिए आप नई चमचमाती कार अपने घर ला सकते हैं। मध्यम वर्ग के लिए यह ऑफर पहली नजर में एक शानदार और आसान मौका लगता है, जिससे प्रभावित होकर कई लोग तुरंत कार खरीदने का मन बना लेते हैं।

लेकिन, क्या वाकई यह डील उतनी ही सस्ती है जितनी दिखाई देती है? विशेषज्ञों के मुताबिक, इस ‘फ्री’ दिखने वाले ऑफर के पीछे भारी-भरकम ब्याज और हिडन चाजर्स का एक ऐसा जाल छिपा है जो आपके मासिक बजट को बिगाड़ सकता है। आइए समझते हैं इसका पूरा गणित।

1. बढ़ जाता है EMI का भारी बोझ

सामान्य कार लोन में ग्राहक को गाड़ी की कीमत का 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा ‘डाउन पेमेंट’ के रूप में खुद देना होता है। लेकिन जीरो डाउन पेमेंट स्कीम में बैंक कार की पूरी ऑन-रोड कीमत (On-Road Price) पर लोन दे देता है। चूंकि लोन की कुल राशि (Principal Amount) बहुत ज्यादा होती है, इसलिए आपकी हर महीने कटने वाली EMI (मासिक किस्त) भी काफी बढ़ जाती है। यह बढ़ा हुआ खर्च आपके मंथली बजट पर सीधा दबाव डालता है। सावधान! ‘Zero Down Payment’ पर कार खरीदने से पहले जान लें ये कड़वा सच, फायदे से ज्यादा हो सकता है नुकसान

2. 1 से 2% तक ज्यादा ब्याज वसूलते हैं बैंक

वित्तीय संस्थान और बैंक जीरो डाउन पेमेंट लोन को एक ‘हाई रिस्क’ (ज्यादा जोखिम वाला) कर्ज मानते हैं। उन्हें डर होता है कि बिना किसी शुरुआती निवेश के लोन लेने वाला व्यक्ति डिफॉल्ट कर सकता है। इस रिस्क की भरपाई करने के लिए बैंक सामान्य कार लोन की तुलना में इस स्कीम पर 1% से 2% तक अधिक ब्याज वसूलते हैं। सुनने में यह 1-2% छोटा लग सकता है, लेकिन 5 से 7 साल के लंबे लोन टेन्योर में यह अंतर लाखों रुपये का बैठता है और आप कार की असल कीमत से कहीं ज्यादा का भुगतान कर बैठते हैं।

3. ‘मुफ्त’ के विज्ञापन में छिपे हैं ये एक्स्ट्रा चार्ज

विज्ञापनों में भले ही ‘बिना पैसे दिए कार ले जाएं’ कहा जाए, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता। गाड़ी लेते समय आपको निम्नलिखित खर्चों का सामना करना पड़ता है:

कई बार कंपनियां इन सभी खर्चों को भी आपके लोन अमाउंट में ही जोड़ देती हैं, जिससे आपका कुल कर्ज और उस पर लगने वाला ब्याज दोनों उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ जाते हैं।

‘लोन एग्रीमेंट’ को बिना पढ़े न करें साइन

इस स्कीम की शर्तें और नियम अक्सर काफी जटिल होते हैं। लोग उत्साह में बिना नियम व शर्तों (Terms and Conditions) को ठीक से पढ़े लोन एग्रीमेंट पर साइन कर देते हैं, जो बाद में भारी पेनाल्टी या छिपे हुए नियमों के रूप में परेशानी का सबब बनते हैं।

बिजनेस ब्यूरो की सलाह: जीरो डाउन पेमेंट कार लोन सुनने में जितना आकर्षक है, वित्तीय रूप से उतना ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अगर आपकी जेब इजाजत देती है, तो हमेशा कुछ न कुछ डाउन पेमेंट देकर ही कार खरीदें। इससे लोन अमाउंट कम होगा, ब्याज दरें सस्ती मिलेंगी और आपकी जेब पर हर महीने एक्स्ट्रा बोझ नहीं पड़ेगा। कोई भी फैसला अपनी वित्तीय क्षमता को तौलने के बाद ही लें।

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