जब तक नहीं हुआ आपसी सहमति से तलाक, तब तक नहीं मिलेगा ‘परमानेंट एलिमनी’; पत्नी को 3 लाख लौटाने के निर्देश

जब तक नहीं हुआ आपसी सहमति से तलाक, तब तक नहीं मिलेगा 'परमानेंट एलिमनी'; पत्नी को 3 लाख लौटाने के निर्देश

जब तक नहीं हुआ आपसी सहमति से तलाक, तब तक नहीं मिलेगा ‘परमानेंट एलिमनी’; पत्नी को 3 लाख लौटाने के निर्देश,

ग्वालियर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने वैवाहिक विवादों और भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाली कानूनी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से तलाक की डिक्री (तलाक का अंतिम आदेश) पारित ही नहीं हुई है, तो पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता (Permanent Alimony) पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता।

इस कड़े रुख के साथ हाई कोर्ट ने पत्नी को निर्देश दिया है कि वह पति से पहली पेशी के दौरान प्राप्त किए गए 3 लाख रुपये तुरंत वापस करे। ऐसा न करने पर उसके खिलाफ कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का मामला चलाया जा सकता है।

किस मामले में हाई कोर्ट ने सुनाया यह फैसला?

यह आदेश न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने नरेंद्र नगरिया द्वारा दायर की गई एक प्रथम अपील की सुनवाई के दौरान दिया:

आपसी सहमति से तलाक की अर्जी: पति-पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए कोर्ट में संयुक्त आवेदन दाखिल किया था। दोनों के बीच आपसी समझौता हुआ था कि पति अपनी पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ते (Permanent Alimony) के रूप में कुल 6 लाख रुपये का भुगतान करेगा।  तय समझौते के अनुसार, कोर्ट में पहली मोशन (First Motion) की सुनवाई के दौरान ही पति ने कुल राशि में से आधे यानी 3 लाख रुपये पत्नी को सौंप दिए थे।

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क्यों अटक गया मामला और क्यों लौटाने पड़े पैसे?

आपसी सहमति से तलाक के मामलों में कानूनन पहली मोशन के बाद दोनों पक्षों को सोचने के लिए 6 महीने का समय दिया जाता है, जिसके बाद दूसरी मोशन (Second Motion) पर अंतिम फैसला यानी तलाक की डिक्री होती है।

लेकिन इस मामले में अंतिम डिक्री पारित होने से पहले ही तकनीकी या आपसी असमंजस के कारण तलाक की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसी बिंदु पर माननीय खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कानून की स्थिति साफ की:

हाई कोर्ट की टिप्पणी: जब तक अदालत से आपसी सहमति के तलाक की अंतिम डिक्री (तलाक का अंतिम आदेश) औपचारिक रूप से जारी नहीं हो जाती, तब तक समझौते के तहत तय किया गया स्थायी गुजारा भत्ता पाने का अधिकार भी अस्तित्व में नहीं आता। चूंकि डिक्री पारित नहीं हुई, इसलिए पत्नी को समझौते के तहत मिले पैसे अपने पास रखने का कोई अधिकार नहीं है।

समय पर पैसे नहीं लौटाए तो होगी ‘अवमानना की कार्रवाई’

ग्वालियर खंडपीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आदेश दिया है कि पत्नी को पति से मिले 3 लाख रुपये हर हाल में वापस करने होंगे। इसके लिए कोर्ट ने एक निश्चित समय-सीमा (तारीख) तय कर दी है। यदि निर्धारित तिथि तक पत्नी यह राशि पति को नहीं लौटाती है, तो इसे अदालती आदेश की अवहेलना माना जाएगा और पत्नी के खिलाफ अवमानना (Contempt) की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

यह फैसला उन मामलों के लिए एक बड़ा उदाहरण बनेगा जहां आपसी सहमति से तलाक के समझौते के बाद कोई एक पक्ष अपने कदम पीछे खींच लेता है या अंतिम डिक्री से पहले मामला लटक जाता है। जब तक नहीं हुआ आपसी सहमति से तलाक, तब तक नहीं मिलेगा ‘परमानेंट एलिमनी’; पत्नी को 3 लाख लौटाने के निर्देश

-, यशभारत डॉट कॉम

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