15 शताब्दी के तुगलक काल का मकबरा रातों रात बन गया मंदिर !

नई दिल्ली। तुगलक काल में 15वीं शताब्दी में बना एक मकबरा रातों-रात मंदिर में बदल दिया गया है। इस मामले में दिल्ली सरकार ने जांच के आदेश दे लिए हैं। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि उन्होने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हैरिटेज (इंटक) की प्राचीन इमारतों की सूची में इसे अज्ञान का मकबरा बताया गया है, जो तुगलक काल में बना था। इसके साथ ही यह मकबरा नगर निगम में मकबरे के रूप में नोटिफाईड है। मगर, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह एक मंदिर था।

स्थानीय रहवासी कल्याण संघ के उपाध्यक्ष रणबीर सिंह ने कहा कि यह इमारत सदियों तक मंदिर रही थी। इतिहास में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि इसका उपयोग कब बदल दिया गया। इस इमारत के ऊपरी हिस्से में एक त्रिशूल लगा हुआ है, जो सदियों पुराना है।

मंदिर में एक पुराने संगमरमर की टाइल्स भी है, जिससे लगता है कि यह शिव मंदिर रहा होगा। ‘गुमटी’ नाम की यह इमारत दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव स्थित हुमायूंपुर गांव में स्थित है। बहरहाल, मार्च में इस मकबरे को गुपचुप तरीके से सफेद और केसरिया रंग से रंगकर कुछ मूर्तियां इसके अंदर रख दी गईं और इसे फिर से मंदिर का स्वरूप दे दिया गया।

ऐसा करना पुरातत्व विभाग के सिटिजन चार्टर का पूरी तरह उल्लंघन है। इसमें साफ लिखा है कि किसी स्मारक के अंदर या बाहर, दीवार को पेंट नहीं किया जा सकता। यह भी कहा गया है कि ऐतिहासिक महत्व वाले इन स्मारकों की मौलिकता को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

इस मामले पर दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। इंटक के एक कर्मचारी ने बताया कि दो तीन साल पहले तक यहां पुराने फर्नीचर और कबाड़ का सामान रखा हुआ रहता था।

स्थानीय लोगों ने बताया कि मार्च में कुछ लोगों ने इसे रातों-रात सफेद और गेरूए रंग में रंग दिया और इसके अंदर मूर्तियां रख दीं। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि मुझे इस बारे में कोई सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने विभाग से जांच करने और रिपोर्ट भेजने की बात कही है।

उधर, इस मामले में इंटक दिल्ली के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि 15वीं सदी के बनाए गए स्मारकों की देखरेख कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्मारक बंद है। इसका पुनरुद्धार का काम स्थानीय लोगों के विरोध की वजह से नहीं हो सका है। हमने पुलिस में भी शिकायत की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

अब इसे एक मंदिर में बदल दिया गया है और और हमने एक स्मारक खो दिया है। इस स्मारक के पास दो गेरुआ रंग की दो बैठने की बेंच लगी हैं। उस पर बीजेपी पार्षद राधिका एबरोल फोगाट का नाम लिखा है। हालांकि, फोगाट ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि स्मारक को मंदिर में बदल दिया गया है।

साल 2010 में इस गुमटी को सांस्कृतिक स्थल का दर्जा मिला था। हालांकि, स्थानीय लोगों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि यह मकबरा किसका है और यहां किसे दफनाया गया था।

Exit mobile version