समदड़िया मॉल की लीज निरस्त, जेडीए को मिलेगा अधिकार

जबलपुर । मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने जबलपुर विकास प्राधिकरण के समदड़िया मॉल की लीज निरस्त करने के फैसले को सही ठहराया है तथा समदड़़िया मॉल लीज को निरस्त कर दिया है । यह ऐतिहासिक फैसला उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ के न्यायाधीश श्री जेके माहेश्वरी व सुजाय पाल ने दिया। इसके साथ ही मॉल के किराएदारों की दुकानों की दुकानों को लेकर भी जो याचिका दायर की गई थी । न्यायालय द्वारा उसे भी खारिज कर दिया गया है अौर बैंक की तरफ से भी जो पिटिशन दायर की गई थी उसे भी मप्र उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया है ।

इसके साथ ही जेडीए को यह आदेश दिया है कि मॉल का नाम बदलकर वह देश के महान अग्रणी लोगों के नाम पर रखा जा सकता है यह याचिका सुशील मिश्रा ने समदड़िया मॉल की जमीन आवंटन के खिलाफ दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि 20 जनवरी 2016 को जेडीए के तत्कालीन सीईओ अवध श्रोत्रिय ने मॉल के खिलाफ एक शिकायत जांच के बाद सही पाया। अपनी इस जांच रिपोर्ट में उन्होंने मॉल को दी गई लीज निरस्त करने की अनुशंसा कर दी। इसके महज दो दिन के बाद ही श्रोत्रिय का तबादला कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से  कोर्ट को बताया गया कि मॉल की तीन मंजिलें पूरी तरह अवैध हैं। श्रोत्रिय ने लीज आवंटन निरस्त करने का अनुमोदन किया था।

जुलाई 2016 में हुआ था आदेश- वहीं बिल्डर्स की ओर से भी याचिका दायर कर लीज आवंटन निरस्त करने की अनुश्ांसा को चुनौती दी गई है। कहा गया कि बिल्डर्स ने सभी नियमों का पालन किया। सभी कानूनी अनुमतियां प्राप्त करने के बाद ही निर्माण किया गया। इसके बावजूद लीज गलत तरीके से निरस्त करने की अनुशंसा की गई। अतिरिक्त आवंटन भी रद्द करो- नगरीय विकास व आवास विभाग प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने उक्त आदेश में कहा है कि अनुबंध की शतोर्ं के पालन न   करने की वजह से भूमि का पट्टा विलेख निरस्त कर जेडीए को इसका स्वामित्व वापस सौंपा जाए। मॉल की जमीन से लगी बिल्डर्स के आधिपत्य वाली जेडीए की अतिरिक्त 6240 वर्गफिट जमीन को रिट अपील का निराकरण होने के बाद संरक्षित करने के लिए कार्रवाई करने को भी कहा गया है। हाईकोर्ट के फैसले का याचिका कर्ता सुशील मिश्रा ने स्वागत किया है।

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