शिकारियों का निशाना बने वनरक्षक को शहीद का दर्जा नहीं दे पाई मध्य प्रदेश सरकार
भोपाल। MP News : शिकारियों की गोली का निशाना बने वनरक्षक दीपू सिंह राणा को 12 दिन बाद भी राज्य सरकार शहीद का दर्जा नहीं दे पाई। इसके लिए वन विभाग को कागजी कार्रवाई करना पड़ रही है। सरकार के इस बर्ताव से वन कर्मचारी नाराज हैं।
उनका कहना है कि सड़क दुर्घटना में मौत होने पर पुलिसकर्मियों को शहीद मान लिया जाता है, पर कर्तव्य पर न्यौछावर हुए वनकर्मियों के हक के लिए लड़ना पड़ता है। उधर, पूर्व वनमंत्री उमंग सिंघार ने भी वनकर्मी को शहीद घोषित करने को लेकर सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने राणा को शहीद का दर्जा और एक करोड़ रुपये अनुदान देने का अनुरोध। किया है। ग्वालियर के घाटीगांव (दक्षिण) के वन परिक्षेत्र सनकुआं में पदस्थ वनरक्षक दीपू सिंह राणा की चार मई को गश्ती के दौरान शिकारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
वन विभाग ने राणा को शहीद माना है, पर सरकार ने अब तक राणा को शहीद घोषित नहीं किया और न ही शहीद के परिवार को दी जाने वाली एक करोड़ रुपये की राशि दी। इससे वन कर्मचारी खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि सामान्य सड़क दुर्घटना में मौत होने पर पुलिसकर्मियों को शहीद घोषित कर दिया जाता है, लेकिन वनकर्मियों के मामले में सरकार संवेदनहीन है।