शर्मनाक : थानेदार को मौत के बाद दी गई इलाज के लिए मनचाही पदस्थापना
भोपाल। पुलिस मुख्यालय में बैठे अफसर भी अजब गजब हैं। उनकी संवेदनशीलता और विभागीय कर्मचारियों को लेकर अभिभावकपन दोनों ही शर्मनाक हैं। दरअसल हाल ही में 133 निरीक्षकों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए। इस सूच्ी में एक ऐसे थानेदार का भी नाम शामिल कर लिया गया, जिनकी मौत एक पखवाड़े पहले ही हो चुकी है। खास बात यह है कि आगर मालवा में पदस्थ रहे थानेदार छोटेलाल सिंह तोमर ने कुछ माह पहले कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए अपनी पदस्थापना ग्वालियर में करने का आग्रह किया था।
उस समय तो उनकी पदस्थापना नहीं की गई , लेकिन अब उनकी मौत के बाद जरुर उनका तबादला ग्वालियर कर दिया गया है। हाल ही में पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी की गई तबादला सूची में 77वें नंबर पर छोटेलाल सिंह तोमर का नाम है। वे मूलतः मुरैना जिले के रहने वाले थे और आगर मालवा जिले में थानेदार के पद पर पदस्थ थे।
उनका तबादला ग्वालियर किया गया है। तोमर ने आगर मालवा एसपी और उज्जैन आईजी के माध्यम से तबादले की अर्जी पीएचक्यू भेजी थी। वे कैंसर से पीड़ित थे और उन्होंने इलाज कराने के लिए ग्वालियर तबादला करने का आग्रह आला अफसरों से किया था। उनकी अर्जी को उज्जैन आईजी ने पुलिस मुख्यालय के लिए अग्रेषित किया था।
उसके बाद से तोमर की अर्जी पुलिस मुयालय के डंठे बस्ते में पड़ी थी। आगर मालवा में इलाज नहीं मिलने के कारण तोमर का 12 नवंबर को निधन हो गया। उनकी मौत के तकरीबन पंद्रह दिन बाद पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी किया और उनका तबादला आगर मालवा से ग्वालियर कर दिया। इससे यह साफ झलकता है कि पुलिस मुख्यालय के अधिकारी कितने जिम्मेदार हैं और मातहतों की फाइलों के प्रति उनका रवैया क्या है। इसके लिए एसपी और आईजी भी कम जिम्मेदार नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने आवेदन को पीएचक्यू भेज कर अपनी इतिश्री समझ ली। संवेदनहीनता का दूसरा पहलू यह भी है कि जब तोमर की मौत हो गई थी, तब भी इसकी सूचना पीएचक्यू को नहीं दी। इसीलिए पीएचक्यू ने उनकी मौत के बावजूद तबादला कर दिया।