भोपाल। MP में राज्यसभा चुनाव से पहले ‘ऑपरेशन’ की आहट? कांग्रेस के गंभीर आरोप, MLA पर कार्रवाई से बदल सकता है पूरा खेल?। मध्यप्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गर्माता जा रहा है। कांग्रेस ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव से पहले विधायकों को तोड़ने और पुराने मामलों को हथियार बनाकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इन घटनाक्रमों के बीच राज्यसभा चुनाव का गणित भी उलझता नजर आ रहा है।
MP में राज्यसभा चुनाव से पहले ‘ऑपरेशन’ की आहट? कांग्रेस के गंभीर आरोप, MLA पर कार्रवाई से बदल सकता है पूरा खेल?
प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास फिलहाल 65 विधायक हैं, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा को मतदान से वंचित कर दिया गया है। वहीं सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे दलबदल के आरोपों में घिरी हैं और पार्टी उन्हें भाजपा के साथ मानकर चल रही है।
इसी बीच दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को आर्थिक अनियमितता के मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि उनके पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प है, लेकिन यदि उन्हें स्थगन नहीं मिलता या सशर्त राहत मिलती है, तो कांग्रेस के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है।
3 सीटों के लिए होगा चुनाव
जून 2026 में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इनमें दो सीटें भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है, जबकि कांग्रेस के लिए एक सीट बचाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
हर वोट की बढ़ी अहमियत
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 प्रथम वरीयता मत जरूरी होते हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस के 2-3 वोट भी कम होते हैं, तो उसका गणित बिगड़ सकता है। फिलहाल संभावित परिस्थितियों में कांग्रेस के पास करीब 62 विधायक ही सुरक्षित माने जा रहे हैं, जो न्यूनतम आंकड़े से थोड़ा ही अधिक हैं।
विपक्ष के आरोप
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए हर संभव तरीका अपना रही है। उन्होंने कहा कि जब विधायकों को तोड़ने की कोशिश सफल नहीं हो रही, तो उनके खिलाफ पुराने मामलों को सक्रिय किया जा रहा है।
सिंघार ने यह भी कहा कि दतिया विधायक राजेंद्र भारती को 25 साल पुराने मामले में सजा दिलाना और अन्य विधायकों के मामलों को अचानक सक्रिय करना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश बताया।
बढ़ता सस्पेंस
हरियाणा और बिहार में हुए हालिया राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थिति के उदाहरण सामने आने के बाद मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस सतर्क हो गई है। पार्टी के लिए अब हर विधायक को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बन गई है।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी उठापटक तेज हो गई है। विधायकों पर कार्रवाई, दलबदल की आशंका और आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनावी समीकरण कभी भी बदल सकते हैं। आने वाले हफ्तों में प्रदेश की राजनीति और भी दिलचस्प होने के संकेत हैं।
