ओबीसी आयोग को मिला संवैधानिक दर्जा-

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग को संवैधानिक दर्जा देने वाले बिल को रोकने के लग रहे आरोपों से कांग्रेस ने आखिरकार अपना पीछा छुड़ा लिया। लोकसभा के बाद सोमवार को कांग्रेस ने राज्यसभा में भी इस बिल का खुलकर समर्थन किया और यह सर्वसम्मति से पारित हो गया। हालांकि इस दौरान वह पुराने मुद्दों को उठाने से नहीं चूकी, लेकिन इसका ध्यान रखा कि विधेयक पारित होने में कोई अड़ंगा न लगे।

संवैधानिक दर्जे के बाद मिलेगा यह अधिकार

– आयोग अब किसी भी ओबीसी जाति को केंद्रीय सूची में शामिल कर सकेगा।

– ओबीसी के उत्थान को लेकर बनने वाली सभी योजनाओं में भागीदारी होगी। अब तक वह बाहर से मूकदर्शक की भूमिका में था।

– आयोग को अब दंड देने का भी अधिकार होगा। जैसा अभी एससी-एसटी आयोग के पास है।

आयोग का होगा यह स्वरूप-

आयोग का एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष होगा। इसके साथ ही इसके तीन सदस्य भी होंगे। इनमें एक महिला होगी।