बड़ी बात यह है कि जाबांज पायलट मीत कुमार अपनी जान देकर हजारों जिंदगियां बचा गए। जहां हादसा हुआ है उसके चारों ओर हजारों की आबादी है। हादसे के बाद कुछ जगह खेतों में आग लगी लेकिन गनीमत यह रही कि वहां काम कर रहे लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। क्षेत्रवासी पायलट के जज्बे को सलाम कर रहे हैं, जिन्होंने पैराशूट की सुविधा के बावजूद लोगों की जान बचाने को प्राणों की आहुति दे डाली है।

घनी आबादी वाला है क्षेत्र

रैहन से फतेहपुर तक का क्षेत्र घनी आबादी वाला है। जहां विमान क्रैश हुआ है उससे 50 मीटर की दूरी पर हाई वोल्टेज तारों का टावर था। साथ ही 100 मीटर की दूरी पर 45 घर थे। गनीमत रही कि विमान 11000 केवी टावर से नहीं टकराया अन्यथा नुकसान कहीं ज्यादा हो सकता था।