फार्म नंबर 26 बना प्रत्याशियों के लिए सिरदर्द
जबलपुर। सभी दलों के लिये नामांकन फॉर्म का 26 नंबर कॉलम सिरदर्द बना हुआ है. विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन के फॉर्म 26 में हर उम्मीदवार को शपथ पत्र में कहा गया है कि ‘कोई प्रत्याशी अगर सरकार के साथ किसी भी प्रकार के ठेके में शामिल होगा तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता.’
यही वजह है कि विरोधी एक दूसरे के काले चिट्ठे खंगालने में जुटे हुये हैं. दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा यह नियम पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट की धारा 9a के तहत लागू किया है. इस नियम के तहत चुने हुए सदन में कोई ठेकेदार ना पहुंच जाए और सदन में बैठकर वह किसी ठेके को प्रभावित ना कर सके. इसी बात को ध्यान में रखकर 1951 में ही यह धारा कानून में डाली गई थी.
निर्वाचन आयोग ने वर्तमान ठेकेदारों को सदन में पहुंचने से रोकने के लिए इस धारा का कड़ाई से पालन करने का मन बनाकर उसे नामांकन फॉर्म में शामिल किया है. जिसमें प्रत्याशियों को यह जानकारी भरनी होगी कि वह सरकार के साथ फिलहाल किसी ठेके में काम नहीं कर रहा है और यदि करता हुआ पाया जाता है तो स्क्रुटनी के दौरान ही उसका फॉर्म निरस्त कर दिया जाएगा. इस नियम के सार्वजनिक होने के बाद नेताओं में खासी हलचल है.

