पितृ ऋण अदा करते देख लोगों ने कहा सचमुच बेटी की महिमा अपरम्पार, पिता को मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज अदा किया
कटनी। लोग बेटों की चाह में न जाने क्या क्या जतन करते हैं पर बेटियां आज समाज की उस धारा से जुड़ चुकीं हैं जिसमें रूढ़िवादिता की कोई जगह नहीं कल तक जो काम समाज की नजरों में सिर्फ बेटों के दायित्व हुआ करते थे आज सामाजिक बन्धनों से हट कर बेटी उस दायित्व को भी निर्भीकता से निभा रही हैं । कटनी में बेटी की ममतामयी निर्भीकता का यही उदाहरण तब देखने को मिला जब एक बेटी ने अपने पिता का वह पितृ ऋण चुकाया जिसे समाज सिर्फ बेटों के फ़र्ज़ समझता है।
गुरुनानक वार्ड निवासी प्रतिष्ठित अधिवक्ता अजय घई का कल असमय निधन हो गया था। अजय की सिर्फ दो बेटी थी। परिवार जनों ने अंतिम संस्कार की तैयारी की तब पुत्र तुल्य की खोज शुरू हुई। लेकिन तभी बड़ी बेटी महिमा घई ने पिता को मुखाग्नि देने की इच्छा प्रगट की।
पहले तो कुछ लोगों ने महिमा के इस फैसले असहमति दर्शाई लेकिन बाद में लोगों ने बिटिया की इच्छा का सम्मान किया। मुक्ति धाम में मुखाग्नि देती इस महिमा जिसने भी देखा वह भावुक हो गया। मन मे सभी के कौंध रहा था सचमुच बेटी की महिमा अपरंपार ही है।
बेटे का फर्ज अदा करती इस बेटी महिमा के प्रति हर व्यक्ति के मन मे सम्मान का भाव था हिन्दू धर्म के अनुसार अंतिम क्रिया के वो सारे संस्कार इस बेटी महिमा ने निर्वहन कर फिर से एक मिशाल पेश की कि बेटी भी पितृ ऋण अदा करने की उतनी ही हकदार है जितने बेटे। महिमा के इस फैसले की आज दिन भर शहर में चर्चा रही।