जबलपुर वेब संस्करण। पंद्रह दिसम्बर से प्रारंभ संसद के शीतकालीन सत्र में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के मध्य गरम बहस के दौरान मध्य प्रदेश से राज्य सभा सांसद श्री विवेक तन्खा द्वारा भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के सम्बन्ध में पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि गत वर्ष सशस्त्र सेनाओं की युद्धक क्षमता संवर्धित करने एवं रक्षा व्यय के पुनर्संतुलन हेतु सुझाओं की संस्तुति हेतु लेफ्टिनेंट जनरल ;सेवानिवृत्त डी बी शेकाटकर की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया जिसका मुख्य उद्द्येश्य सेना मुख्यालयों के पुनर्गठन सहित इसके आधुनिकीकरण सैन्य अधिकारियों सैनिकों और नागरिकों के लगभग 57ए000 पदों के पुनर्निर्माण और पुनर्गठन शामिल हैं।
समिति ने अपनी रिपोर्ट दिसंबर 2016 में प्रस्तुत की
शेकाटकर समिति की सिफारिशों लागू करने से सेना के संरक्षित क्षेत्रों और उपक्षेत्रों के इष्टतमिकरण के कारण जनशक्तिए धन और बुनियादी ढांचे में सुधार आएगा एवं समय की भी बचत होगी। इससे सेना की गुणवत्ताए जवाबदेही और उत्तरदायित्व में भी सुधार लाएगा। समिति की सिफारिशों में उच्च रक्षा संगठनए पुनर्गठन और मंत्रालय की स्टाफिंगए आयुध कारखानों और गुणवत्ता आश्वासन ;डीजीक्यू के निदेशालय शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार उक्त सिफारिशों में भारतीय सेना के मध्य भारत कमान के मुख्यालय को जबलपुर से स्थानांतरित करने का सुझाव दिया गया था किन्तु मंत्रालय ने इस प्रान्त की संवेदनशीलता को ध्यान में रखे हुए इस सुझाव को दरकिनार कर दिया अब जबलपुर स्थित सेना मुख्यालय स्थानांतरित नहीं किया जायेगा
श्री तन्खा ने कहा कि यह निश्चित रूप से एक दूरगामी कदम है और बदलते परिप्रेक्ष्य में भारतीय सेना का आधुनिकीकरण अत्यंत आवश्यक है। महाकौशल प्रान्त एवं विशेषकर जबलपुर के भौगोलिक एवं सामरिक महत्त्व को नाकारा नहीं जा सकता श्री तन्खा ने जबलपुर के हित में उचित फैसले लेने के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री को धन्यवाद् ज्ञापित करने हुए कहा कि यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होने के साथ संवेदनशील भी हैण् यहाँ पर भारतीय सेना का तोपगाड़ी बनाने का केंद्रीय कारख़ाना शस्त्र निर्माण कारख़ाना और शस्त्रागार भी स्थित है। ज्ञात हो कि श्री तन्खा श्री अरुण जेटली के केंद्रीय रक्षा मंत्री के कार्यकाल के दौरान केंद्रीय रक्षा समिति एवं केंद्रीय रक्षा सलाहकार समिति के सदस्य रहे है
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