जबलपुर। अायुध निर्माणी मे स्क्रेप चोरी का मामला अब ठण्डे बस्ते मे जा चुका है। जांच एजेंसियां अब ठेकेदार के लोगों द्वारा फैक्टरी के अंदर मोबाईल ले जाने के मामले मे जांच कर रही है। निर्माणी प्रशासन को दी गई इस रिपोर्ट को लेकर श्रमिक नेताओ
ं ने साफ कहा है कि ओएफके की सुरक्षा को लेकर अब खिलवाड़ किया जा रहा है।
फर्म संचालक को मिली क्लीन चिट
सूत्र बताते हैं कि दमोहनाका क्षेत्र स्थित मेसर्स जबलपुर स्टील प्रालि. ने ओएफके से स्क्रैप खरीदने का ठेका लिया है। इस कंपनी के ट्रकों में
स्क्रैप की आड़ में चोरी का पीतल लदा पाया गया। सुरक्षा विभाग ने फर्म संचालक अजय खंडेलवाल को गुरुवार को जवाब देने बुलावा भेजा। फिर भी फर्म संचालक निर्माणी तक नहीं गए, लेकिन अपने सुपरवाइजर को जरूर भेज दिया था।जिसने तर्क दिया कि
खड़े हो र
हे सवाल
. निजी संस्थान के मिनी ट्रकों को स्क्रैप लेकर शाम 4.30 बजे से पहले ओएफके से बाहर जाने का नियम है। फिर गेट नं.1 पर शाम 6 बजे स्क्रैप से लदे मिनी ट्रक क्यों पहुंचे?
. निर्माणी के गेट पर आते-जाते वाहन, व्यक्ति की तलाशी लेकर ही छोडऩे
का नियम है। बावजूद इसके निजी संस्थान के ट्रक में सवार मजदूर व सुपरवाइजर अपने साथ 6 मोबाइल सहित अंदर कैसे गए?
. ट्रकों में स्क्रैप लादते समय डीएससी का पहरा रहा, तो ट्रक ड्राइवर या मजदूरों ने पीतल कहां से और कैसे चुराकर लाद लिया?
. निर्माण्
ाी का कर्मचारी चोरी के माल सहित पकड़ जाने पर उसका वाहन जब्त करके उसे मामले की जांच, सुनवाई पूरी होने तक रखा रहता है। सुरक्षा विभाग ने चोरी के माल सहित पकड़े गए मिनी ट्रक गुरुवार को क्यों छोड़ दिए?
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