ऑर्डर-ऑर्डर बोलने वाले ‘साइकिल से माय लॉर्ड जब चमचमाती कारें खड़ी कर लखनऊ की सड़कों पर पैडल मारने लगे हाई कोर्ट के जज, तस्वीरें देख देश कर रहा सलाम
ऑर्डर-ऑर्डर बोलने वाले ‘साइकिल से माय लॉर्ड’ जब चमचमाती कारें खड़ी कर लखनऊ की सड़कों पर पैडल मारने लगे हाई कोर्ट के जज, तस्वीरें देख देश कर रहा सलाम। पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection) और देश में बढ़ते पेट्रोल-डीजल संकट के खिलाफ लखनऊ से एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है। समाज को एक बड़ा और सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से आज लखनऊ हाई कोर्ट के 50 से अधिक माननीय जज और न्यायिक अधिकारी अपनी सरकारी लग्जरी गाड़ियां छोड़कर साइकिल चलाकर कोर्ट पहुंचे। न्यायपालिका के इस अनूठे कदम की न सिर्फ पूरे लखनऊ शहर में, बल्कि सोशल मीडिया पर भी जमकर तारीफ हो रही है। लोग जजों की इस सादगी और पर्यावरण के प्रति उनकी संवेदनशीलता को सलाम कर रहे हैं।
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ऑर्डर-ऑर्डर बोलने वाले ‘साइकिल से माय लॉर्ड’ जब चमचमाती कारें खड़ी कर लखनऊ की सड़कों पर पैडल मारने लगे हाई कोर्ट के जज, तस्वीरें देख देश कर रहा सलाम
डालीबाग सेशंस हाउस से निकली ‘जजों की साइकिल रैली’
मिली जानकारी के अनुसार, इस विशेष अभियान की शुरुआत आज सुबह लखनऊ के डालीबाग स्थित सेशंस हाउस से हुई। हरी झंडी दिखाकर किया रवाना: सुबह-सुबह लखनऊ हाई कोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने इस अनूठी साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर कोर्ट परिसर के लिए रवाना किया एकजुट हुए न्यायिक अधिकारी: डालीबाग में सभी जज अपने हाथों में साइकिल थामे एकत्र हुए। इसके अलावा जिला जज मलखान सिंह के सरकारी आवास पर भी बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी जुटे और सभी एक साथ पैडल मारते हुए अदालत की ओर बढ़े। सड़क पर एक साथ इतने सारे माननीय जजों को आम जनता की तरह साइकिल चलाते देख राहगीर भी हैरान रह गए और लोगों ने तालियां बजाकर इस पहल की सराहना की।
क्या है इस ‘साइकिल अभियान’ का मुख्य उद्देश्य?
जजों की इस पहल का मकसद केवल एक दिन का दिखावा या प्रतीक मात्र होना नहीं है। इसके पीछे कई गंभीर उद्देश्य छिपे हैं। ईंधन की बचत: लगातार बढ़ती ईंधन की कीमतों और सीमित प्राकृतिक संसाधनों (पेट्रोल-डीजल) को बचाने के लिए आम जनता को जागरूक करना। गाड़ियों से निकलने वाले धुएं के कारण लखनऊ सहित पूरे देश में बढ़ रहे एयर पॉल्यूशन को कम करने के लिए छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाना। लोगों को यह याद दिलाना कि रोजाना थोड़ी देर साइकिल चलाने से न सिर्फ पैसों की बचत होती है, बल्कि सेहत भी तंदुरुस्त रहती है।
यह सिर्फ शुरुआत है, आगे भी जारी रहेगा अभियान
न्यायिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम केवल एक दिन की प्रतीकात्मक (Symbolic) गतिविधि नहीं है। जजों और वकीलों के इस समूह ने संकल्प लिया है कि इस अभियान को आने वाले दिनों में भी लगातार जारी रखा जाएगा, ताकि समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा सके। देश भर में जहाँ लोग लगातार महंगे होते पेट्रोल-डीजल और पर्यावरण में घुलते जहर से परेशान हैं, वहीं न्यायपालिका का यह कदम बदलाव की दिशा में एक ‘मील का पत्थर’ साबित हो सकता है।

