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तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विविध कार्यक्रम आयोजित

तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विविध कार्यक्रम आयोजि

कटनी-प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर वनस्पति शास्त्र विभाग, इको क्लब के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता कार्यशाला एवं शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आज का यह शैक्षणिक भ्रमण और जैव विविधता दिवस का कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर सुनील कुमार बाजपेई, प्रभारी प्राचार्य डॉ माधुरी गर्ग के दिशा निर्देशन से आयोजित किया गया। कार्यक्रम वनस्पति शास्त्र की विभागाध्यक्ष श्रीमती ज्योत्सना आठ्या के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी एवं संस्था प्रमुख संजय उपस्थित रहें। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण के सहयोग से कैसे हम कृषि को और बेहतर बना सकते हैं इस पर जानकारी दी। उनकी जानकारी से विद्यार्थी काफी लाभान्वित हुए,जैव विविधता दिवस पर यह संकल्प का आह्वाहन किया कि पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण ही आज के समय में सबसे बड़ा मूल्यवान कार्य है। इसके माध्यम से ही हम दुनिया को अपने पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और जागरूक बना सकते हैं। ज्योत्सना आठ्या ने कहा कि जैव विविधता केवल पर्यावरण का विषय नहीं बल्कि मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि छोटे-छोटे स्थानीय प्रयास वैश्विक स्तर पर बड़े परिवर्तन ला सकते हैं।

 

कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला संगठक डॉ. रुक्मणि प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जैव विविधता संरक्षण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए समाज में जनजागरूकता आवश्यक है तथा NSS स्वयंसेवकों को प्रकृति संरक्षण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। कार्यक्रम के अंतर्गत महाविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थियों का एक दल कृष विज्ञान केंद्र, पिपरौध कटनी पहुंचा, जहां कृषि वैज्ञानिक अधिकारी आर. पी. बैन ने प्राकृतिक कृषि एवं जैविक खेती के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। प्राकृतिक कृषि न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि मानव स्वास्थ्य एवं जैव विविधता संरक्षण के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों पर आधारित टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।कार्यशाला में जैव विविधता दिवस 2026 की थीम “वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करने पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि जंगलों की कटाई, शहरीकरण, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन तथा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण अनेक जीव एवं वनस्पति प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही हैं।

इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों ने “प्रकृतिः रक्षति रक्षिताः” के संदेश को आत्मसात करते हुए जैव विविधता संरक्षण की शपथ ली। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने आज अपने विभागीय शिक्षक समूह के साथ कृष विज्ञान केंद्र पिपरौंध की शैक्षणिक यात्रा भी की। यह कार्यक्रम वही सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय की ओर से डॉ. शोभाराम पाटिल, डॉ. शिवनंद पटेल, डॉ.अनिल कुमार गौतम एवं डॉ. दीपेंद्र सिंह राजपूत सहित शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Rohit Sen

15 वर्षों से प्रिंट एवं डिजीटल मीडिया में कार्य का अनुभव वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में जिला प्रतिनिधि