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एचआइवी पीड़ि‍त महिला में 216 दिन रहा कोरोना संक्रमण, हुए 32 म्यूटेशन, जानें पूरा वाकया

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नई दिल्ली । दक्षिण अफ्रीका में शोधकर्ताओं ने एडवांस एचआइवी से पीड़ि‍त एक 36 वर्षीय महिला में संभावित रूप से खतरनाक कोरोना वायरस म्यूटेशंस का पता लगाया है।

इस महिला में कोरोना वायरस का संक्रमण 216 दिनों तक रहा और इस दौरान महिला के शरीर में वायरस के 32 म्यूटेशन हुए। यह केस रिपोर्ट मेडिकल जर्नल ‘मेडरेक्सिव’ में प्री-प्रिंट के रूप में गुरुवार को प्रकाशित हुई है।

वायरस ने खुद में किए बदलाव

रिपोर्ट के मुताबिक, उक्त महिला को 2006 में एचआइवी से पीडि़त होने का पता चला था और समय के साथ उसका इम्यून सिस्टम कमजोर होता गया। सितंबर, 2020 में कोरोना से संक्रमित होने के बाद वायरस ने स्पाइक प्रोटीन में 13 म्यूटेशन और 19 अन्य आनुवांशिक बदलाव किए जो वायरस के व्यवहार को बदल सकते थे।

कुछ म्यूटेशन हैरान करने वाले

इनमें से कुछ म्यूटेशन चिंतित करने वाले वैरिएंट के रूप में देखे गए हैं मसलन – ई484के म्यूटेशन जो अल्फा वैरिएंट बी.1.1.7 (पहली बार ब्रिटेन में देखा गया) का हिस्सा है और एन510वाई म्यूटेशन जो बीटा वैरिएंट बी.1.351 (पहली बार दक्षिण अफ्रीका में देखा गया) का हिस्सा है।

दक्षिण अफ्रीका में ज्‍यादातर नए वैरिएंट

शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह स्पष्ट नहीं हुआ कि उक्त महिला ने इन म्यूटेशंस से अन्य लोगों को भी संक्रमित किया। हालांकि, उनका कहना है कि संभवत: यह संयोग नहीं है कि नए वैरिएंट ज्यादातर दक्षिण अफ्रीका में क्वाजुलु नटाल जैसे इलाकों में उभरे हैं जहां प्रत्येक चार वयस्कों में एक से अधिक एचआइवी पाजिटिव हैं।

एचआइवी पीड़ितों में संक्रमण की संभावना ज्‍यादा

यद्यपि इस बात के बहुत कम साक्ष्य हैं कि एचआइवी संक्रमित लोगों में कोरोना संक्रमण की संभावना ज्यादा है और उनमें गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं विकसित हो रही हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे और अधिक मामले पाए गए तो एडवांस एचआइवी से पीडि़त मरीज पूरी दुनिया के लिए वैरिएंट्स की फैक्ट्री बन सकते हैं।

शुरुआती में दिखे हल्के लक्षण

इस अध्ययन के लेखक और डरबन की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वाजुलु नटाल में आनुवांशिक विज्ञानी टूलियो डी ओलिवेरा ने एलए टाइम्स को बताया कि कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों में कोरोना वायरस का संक्रमण अन्य लोगों की तुलना में अधिक समय तक रह सकता है। उक्त महिला के बारे में ओलिवेरा ने कहा कि उसमें शुरुआती दौर में हल्के लक्षण ही दिखे और तब भी जब वह संक्रमित बनी रही।

इलाज करने पर दिया जोर

शोधकर्ता ने ऐसे लोगों का टेस्ट और इलाज करने पर जोर दिया जो एचआइवी संक्रमित हैं, लेकिन उन्हें पता नहीं है। इससे एचआइवी से होने वाली मौतों में कमी आएगी, एचआइवी का संक्रमण घटेगा और कोरोना के नए वैरिएंट विकसित होने की संभावना भी घटेगी जो अगली लहर का कारण बन सकते हैं।

एचआइवी मरीजों में म्यूटेशन

अगर आगे के अध्ययनों में एचआइवी मरीजों में म्यूटेशन और कोरोना वायरस के फैलाव के बीच मजबूत संबंध मिला तो यह भारत के लिए चिंता का सबब होगा जहां एचआइवी के ऐसे करीब 10 लाख संक्रमित हैं जिन्हें इलाज नहीं मिला है।

 

 

 

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