मध्यप्रदेश

अफसरों ने सोशल साइट के जरिए निगम आयुक्त पर ऐसे निकाला गुस्सा

भोपाल। कम्प्लीशन सर्टिफिकेट घोटाले में हटाए गए अपर आयुक्त मलिका निगम नागर और वीके चतुर्वेदी निगम प्रशासन द्वारा की गई एकतरफा कार्रवाई से आहत होकर सोशल साइट पर दोनों ने भड़ास निकाली है। चतुर्वेदी ने अपनी वॉल पर लिखा है, ‘आज भोपाल नगर निगम से विदा। उच्च स्तर से घटिया षडयंत्र कैसे किए जाते हैं, इसका अनुभव। इस पर मलिका ने कमेंट किया, मिली-जुली सरकार। यही नहीं मलिका ने भी अपनी वॉल पर नाराजगी को खुलकर लिखा है। ‘न दलील, न वकील, न अपील… सीधे फैसला। आज भी हम क्या रॉलेट एक्ट के जमाने में हैं। हम में और अंग्रेजों में क्या अंतर है।’

मलिका ने अंग्रेजों के जमाने के उस रॉलेट एक्ट का जिक्र किया है जिसमें किसी भी भारतीय को बिना मुकदमा चलाए ही सजा दे दी जाती थी। नगर निगम के इतिहास में संभवतः पहला मौका है कि हटाए गए अफसरों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।

बता दें कि गत सोमवार को निगम आयुक्त प्रियंका दास द्वारा तैयार की गई घोटाले की फाइनल रिपोर्ट को निगम परिषद के पटल पर रखा गया था। आयुक्त ने रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि अपर आयुक्त मलिका, चतुर्वेदी और सिटी इंजीनियर जीएस सलूजा को मूल विभाग में भेजा जाए। पहले अधिकारियों को नोटिस देकर सुनवाई की तैयारी थी लेकिन जैसे ही परिषद में प्रस्ताव मंजूर हुआ आयुक्त ने रात को ही तीनों अधिकारियों को एकतरफा रिलीव कर दिया।

निशाने पर आयुक्त

हटाए गए अफसरों ने उच्च स्तर से षडयंत्र की बात कही है। निगम में उनसे ऊपर निगम आयुक्त दास हैं। ऐसे में पूरा गुस्सा का इशारा आयुक्त की तरफ ही है। इस कार्रवाई के बाद मंत्रालय तक चर्चा चल रही है।

पार्षद, अधिकारियों ने दी प्रतिक्रया

नागर और चतुर्वेदी की पोस्ट पर पार्षदों, अधिकारियों सहित कर्मचारियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस पार्षद शबिस्ता जकी ने लिखा है, सर, लोगों को ईमानदारी पसंद नहीं। वहीं तहसीलदार मनोज श्रीवास्तव ने मलिका की पोस्ट को 100 फीसदी सही बताया। कुछ लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए वहां से हटने पर बधाई दी है। बड़ी संख्या में लोगों ने पोस्ट को लाइक किया है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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