US Sanctions: चीन की रिफाइनरी और 40 शिपिंग कंपनियों पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, ईरानी तेल कारोबार पर कसा शिकंजा
US Sanctions: चीन की रिफाइनरी और 40 शिपिंग कंपनियों पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, ईरानी तेल कारोबार पर कसा शिकंजा। अमेरिका ने ईरानी तेल के कारोबार पर बड़ा प्रहार करते हुए चीन स्थित एक प्रमुख रिफाइनरी और करीब 40 शिपिंग कंपनियों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
US Sanctions: चीन की रिफाइनरी और 40 शिपिंग कंपनियों पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, ईरानी तेल कारोबार पर कसा शिकंजा
जानकारी के अनुसार, Donald Trump प्रशासन ने यह कार्रवाई उस समय की है जब पहले ही चेतावनी दी गई थी कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों और कंपनियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
तेल सप्लाई पर बड़ा असर
अमेरिका ने Strait of Hormuz पर भी नाकेबंदी लागू कर दी है, जो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम मार्ग है। इस जलमार्ग से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है, ऐसे में इस कदम का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
चीन की बड़ी रिफाइनरी निशाने पर
प्रतिबंधों के दायरे में Hengli Petrochemical की रिफाइनरी भी शामिल है, जो रोजाना लगभग 4 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता रखती है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह रिफाइनरी 2023 से ईरानी तेल खरीद रही थी, जिससे ईरान को करोड़ों डॉलर की आमदनी हो रही थी।
ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने कहा कि अमेरिका उन सभी नेटवर्क्स पर कार्रवाई जारी रखेगा, जो ईरान के तेल को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।
कई देशों को चेतावनी
अमेरिका ने चीन, हांगकांग, यूएई और ओमान के वित्तीय संस्थानों को भी सख्त चेतावनी दी है कि यदि वे ईरान के साथ व्यापार जारी रखते हैं, तो उन पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
ग्लोबल बाजार में उथल-पुथल
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतें पहले ही तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रतिबंधों से न सिर्फ ग्लोबल सप्लाई प्रभावित होगी, बल्कि United States और China के बीच तनाव भी बढ़ सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए रूसी तेल पर कुछ छूट दी है, जबकि ईरानी तेल पर सख्ती और बढ़ा दी गई है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। आने वाले समय में तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

