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UP: सपा-बसपा और कांग्रेस का ये टिकट प्लान बताता है कांग्रेस वोट कटवा है!

UP डेस्‍क। कांग्रेस के ऊपर उंगली उठने लगी है कि क्या कांग्रेस अब सिर्फ वोट कटवा पार्टी रह गई है. क्या कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनावों की लड़ाई में नहीं है।

अमेठी-रायबरेली में रैली के दौरान हालांकि प्रियंका गांधी खुद कह चुकी हैं कि उनके कमजोर उम्मीदवार बीजेपी का वोट काट रहे हैं. जहां कांग्रेस मजबूत है वहां हम बीजेपी को हरा रहे हैं. लेकिन उनके इस बयान को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. कांग्रेस के ऊपर उंगली उठने लगी है कि क्या कांग्रेस अब सिर्फ वोट कटवा पार्टी रह गई है. क्या कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनावों की लड़ाई में नहीं है. इस बारे में न्यूज18 हिन्दी ने जानी सियासत के जानकारों से उनकी राय.

डॉ. बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद अरशद का कहना है, “प्रियंका गांधी ने एकदम सही बात कही है. यूपी में कांग्रेस जिन हालात में चुनाव लड़ रही है वो ही बात प्रियंका ने कही है. सही बात तो ये है कि यूपी में चुनाव सपा-बसपा और कांग्रेस के बीच हुई टिकट डील के तहत लड़ा जा रहा है. वो डील खुद प्रियंका गांधी के बयान पर मुहर लगाती है.

बात अमरोहा की करें तो डील के तहत ही राशिद अल्वी को टिकट दिया गया और उसी डील के मुताबिक ही वापस कराया गया. आगरा की शहर सीट पर भी आप देखेंगे कि राहुल गांधी और प्रियंका ने चुनावी रैली की लेकिन वो फतेहपुर सीकरी से उम्मीदवार राजबब्बर को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्र में की गई. शहर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार के लिए कोई कैंपेन तक नहीं किया गया.

मायावती खुद अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस के लिए वोट मांग रहीं हैं. मुलायम सिंह यादव, डिंपल यादव आदि के सामने कांग्रेंस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है. कुल मिलाकर कांग्रेस की रणनीति ये है कि जहां काग्रेंस मजबूत नहीं है वहां ऐसा कमजोर उम्मीदवार उतारा गया है जो कांग्रेस के हाई कास्ट वाले उस वोट को बीजेपी में न जाने दे जो 15-20 हजार के रूप में उसे मिलता रहा है. ये वो वोट है जो कांग्रेस के मैदान मे न होने पर सपा-बसपा को तो कभी नहीं मिलेगा.”

दूसरी ओर सीसीएस यूनिवर्सिटी, मेरठ से पॉलीटिकल साइंस के रिटायर्ड प्रोफेसर आरबी सिंह का कहना है, “सही बात तो ये है कि यूपी में अब कांग्रेस के पास उसका कोई बेस वोट बैंक नहीं बचा है. जो थोड़ा बहुत रह गया है तो वो उसे काटकर बीजेपी को कमजोर और महागठबंधन को मजबूत करना चाहती है. और जहां मजबूत है तो ऐसी 15 से 20 सीट पर वो खुलकर लड़ रही है. और ये रणनीति यूपी में चल रही है.

दूसरी जगहों पर कांग्रेस चुनाव को उसी तरह से लड़ रही है जैसा की उसे लड़ना चाहिए. मैं नहीं समझता कि इसमे कुछ गलत है. ये तो सियासत की एक चाल है चुनाव को जीतने के लिए. अगर ये तीनों लोग साथ आ जाते चुनाव लड़ने तो वो भी इनके लिए घातक होता.”

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