चैंबर चुनाव में इस बार बड़ा उलटफेर: ‘किंग’ ही नहीं, ‘मेकर’ बनने के लिए भी मची होड़; 150 कार्यकारिणी सीटों के लिए बिके 422 फॉर्म, जानें अंदर की वजह

चैंबर चुनाव में इस बार बड़ा उलटफेर: 'किंग' ही नहीं, 'मेकर' बनने के लिए भी मची होड़; 150 कार्यकारिणी सीटों के लिए बिके 422 फॉर्म, जानें अंदर की वजह

चैंबर चुनाव में इस बार बड़ा उलटफेर: ‘किंग’ ही नहीं, ‘मेकर’ बनने के लिए भी मची होड़; 150 कार्यकारिणी सीटों के लिए बिके 422 फॉर्म, जानें अंदर की वजह

व्यापारिक डेस्क। चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनावों में यूं तो हमेशा सारी लाइमलाइट और लोगों की निगाहें अध्यक्ष, सचिव जैसे मुख्य पदाधिकारियों के पदों पर टिकी रहती हैं, क्योंकि असली सियासी टक्कर इन्हीं चेहरों के बीच होती है। लेकिन इस बार का चुनावी समीकरण बदला-बदला नजर आ रहा है। इस साल पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि कार्यकारिणी सदस्य (Executive Member) बनने के लिए भी व्यापारियों में जबरदस्त होड़ मची हुई है।

अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नामांकन प्रक्रिया के शुरुआती तीन दिनों के भीतर ही कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए 422 लोगों ने नामांकन फॉर्म खरीद लिए हैं, जबकि चैंबर में कार्यकारिणी सदस्यों की कुल संख्या सिर्फ 150 है, जिन्हें 53 अलग-अलग व्यापारिक समूहों से चुना जाना है।

 तीसरे दिन की चुनावी हलचल: फॉर्म बिक्री के आंकड़े

चैंबर चुनाव के तीसरे दिन नामांकन फॉर्म खरीदने वालों की कतारें लगी रहीं। अब तक के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

आखिर क्यों मची है कार्यकारिणी सदस्य बनने की चाहत? जानें ‘इनसाइड स्टोरी’

चैंबर की राजनीति और नियमों को करीब से जानने वाले वरिष्ठ सदस्यों ने इस अप्रत्याशित भीड़ के पीछे की असली वजह का खुलासा किया है। दरअसल, यह सिर्फ सदस्य बनने की होड़ नहीं है, बल्कि भविष्य में ‘अध्यक्ष’ या ‘बड़ा पदाधिकारी’ बनने की दूरगामी रणनीति है।

राम मंदिर चंदा चोरी केस में बड़ा एक्शन: सभी 8 आरोपी गिरफ्तार, SIT रिपोर्ट के बाद महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की तैयारी

 चैंबर का कड़ा नियम: चैंबर ऑफ कॉमर्स के संविधान के मुताबिक, कोई भी सदस्य सीधे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सचिव जैसे मुख्य पदाधिकारी पद का चुनाव नहीं लड़ सकता। पदाधिकारी पद की योग्यता के लिए किसी भी सदस्य को कम से कम तीन बार (3 Terms) कार्यकारिणी का सदस्य होना अनिवार्य है।

यही कारण है कि भविष्य की बड़ी राजनीतिक बिसात बिछाने के लिए युवा और नए व्यापारी इस बार भारी संख्या में जमीन तैयार कर रहे हैं ताकि आने वाले सालों में वे मुख्य पदों के लिए अपनी दावेदारी ठोक सकें। 28 जून को नामांकन बंद होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि कुल कितने उम्मीदवार मैदान में डटे रहते हैं और कितनों के फॉर्म वापस होते हैं।

Exit mobile version