Ram Mandir Donation Issue: चंपत राय ने दिया इस्तीफा, ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी छोड़ा पद

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दानपात्र से करोड़ों रुपये के कथित चढ़ावा चोरी और गबन का मामला सामने आने के बाद अयोध्या से लेकर दिल्ली तक की सियासत पूरी तरह सुलग उठी है। विपक्ष के चौतरफा हमलों और भारी दबाव के बीच, गुरुवार और शुक्रवार को सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में यह खबर तेजी से फैल गई कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

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सूत्रों की मानें तो इस बड़े विवाद के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्रा भी मंदिर प्रबंधन को लेकर गंभीर हैं।

  • CEO की नियुक्ति की चर्चा: मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार अब ट्रस्ट में एक अनुभवी और प्रशासनिक क्षमता वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर कानूनी राय ले रही है।

  • जांच का बढ़ता दायरा: अयोध्या पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की जांच कर मनी ट्रेल स्थापित करने में जुटी है, जिससे यह साफ हो सके कि चंदा चोरी का पैसा कहां-कहां ट्रांसफर हुआ।

 क्यों बढ़ा चंपत राय पर इस्तीफे का दबाव?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी (SIT) की जांच और पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी टिन्नू यादव समेत 8 लोगों की गिरफ्तारी के बाद से ही विपक्ष लगातार हमलावर है:

  • विपक्ष का सीधा निशाना: समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, पवन पांडेय और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सीधे चंपत राय पर आरोप लगाया है कि इतने बड़े घोटाले की निष्पक्ष जांच तब तक नहीं हो सकती, जब तक चंपत राय अपने पद पर बने हुए हैं।

  • संत समाज का आक्रोश: प्रयागराज और अयोध्या के कई बड़े साधु-संतों (जैसे स्वामी महेशाश्रम महाराज) ने भी खुलकर मांग की है कि जांच को अप्रभावित रखने के लिए चंपत राय को तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए या उन्हें खुद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।