RBI का ऐतिहासिक फैसला: ऑनलाइन फ्रॉड हुआ तो मिलेगा ₹25,000 तक का मुआवजा; आपकी गलती होने पर भी मिलेगी राहत, जानें नया नियम

RBI का ऐतिहासिक फैसला: ऑनलाइन फ्रॉड हुआ तो मिलेगा ₹25,000 तक का मुआवजा; आपकी गलती होने पर भी मिलेगी राहत, जानें नया नियम

RBI का ऐतिहासिक फैसला: ऑनलाइन फ्रॉड हुआ तो मिलेगा ₹25,000 तक का मुआवजा; आपकी गलती होने पर भी मिलेगी राहत, जानें नया नियम

मुंबई। डिजिटल पेमेंट और यूपीआई (UPI) के इस दौर में ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी के शिकार होने वाले लोगों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बड़ा सुरक्षा कवच लेकर आया है। कई बार शिकायत के बाद भी पीड़ितों को अपनी डूबी हुई रकम वापस नहीं मिल पाती थी, लेकिन अब आरबीआई ने साफ कर दिया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में पात्र ग्राहकों को 25,000 रुपये तक का मुआवजा (Compensation) दिया जाएगा। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की गई यह नई गाइडलाइन 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगी।

 किन-किन डिजिटल भुगतानों पर काम करेगा यह नियम?

आरबीआई का यह नया नियम किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। यह सभी तरह के इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शंस पर समान रूप से लागू होगा:

 कब और कैसे मिलेगी पूरी रकम वापस?

नए नियमों के तहत जिम्मेदारी तय करने के लिए तीन अलग-अलग परिस्थितियां बनाई गई हैं:

 बैंक की गलती या सिस्टम डिफेक्ट होने पर:

अगर ऑनलाइन फ्रॉड बैंक की किसी तकनीकी लापरवाही, सर्वर की सुरक्षा में कमी या सिस्टम की गड़बड़ी के कारण हुआ है, तो इसमें ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य (Zero Liability) होगी। ऐसे मामलों में बैंक को पीड़ित ग्राहक की पूरी की पूरी रकम वापस लौटानी होगी, चाहे ग्राहक ने समय पर शिकायत दर्ज की हो या नहीं।

 थर्ड पार्टी ऐप या टेलीकॉम प्रोवाइडर की गलती पर:

अगर फ्रॉड किसी तीसरे पक्ष (जैसे पेमेंट गेटवे, टेलीकॉम ऑपरेटर या किसी वॉलेट ऐप) की गड़बड़ी से हुआ है, तो भी ग्राहक को पूरी रकम वापस मिलेगी। इसके लिए बस एक ही शर्त है कि फ्रॉड होने के 5 कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक को आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज करानी होगी।

 सबसे बड़ा बदलाव: अपनी गलती (जैसे OTP शेयर करने) पर भी मिल सकती है राहत!

इस नीति की सबसे अनोखी और खास बात यह है कि कुछ मामलों में अगर लापरवाही ग्राहक की तरफ से भी हुई है, तो भी उसे पूरी तरह बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा।

⚠️ उदाहरण के लिए: यदि किसी ग्राहक ने अनजाने में किसी फिशिंग लिंक (Phishing Link) पर क्लिक कर दिया या घबराहट में आकर अपना ओटीपी (OTP) शेयर कर दिया, लेकिन उसे तुरंत अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने तुरंत बैंक को सूचना देकर ट्रांजैक्शन ब्लॉक कराया, तो वह मुआवजे का हकदार होगा। (नोट: हालांकि, यदि बैंक यह साबित कर देता है कि ग्राहक ने बार-बार दी गई स्पष्ट चेतावनियों को नजरअंदाज कर जानबूझकर गंभीर लापरवाही की, तो राहत नहीं मिलेगी।)

 मुआवजे का पूरा गणित: किसे और कितना मिलेगा पैसा?

आरबीआई ने मुआवजे की रकम और सीमाओं को बेहद पारदर्शी तरीके से तय किया है:

कौन उठाएगा मुआवजे के पैसों का खर्च?

इस व्यवस्था में राहत की बात यह है कि मुआवजे की पूरी राशि का बोझ अकेले पीड़ित के बैंक पर नहीं डाला जाएगा। नुकसान की भरपाई के लिए एक पूल बनाया गया है:

  1. मुख्य हिस्सेदारी: मुआवजे की इस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा खुद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वहन करेगा।

  2. बाकी हिस्सेदारी: शेष राशि का भुगतान ग्राहक का खुद का बैंक और वह ‘लाभार्थी बैंक’ (Beneficiary Bank) मिलकर करेंगे, जिस फ्रॉड खाते में ठगी का पैसा ट्रांसफर हुआ था।

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